दुर्ग, 10 जून। Durg Hospital : दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल बीमारी से पीड़ित 21 वर्षीय युवती दीपिका की मौत ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि अस्पताल के ब्लड बैंक में ओ पॉजिटिव ग्रुप के 85 यूनिट रक्त उपलब्ध थे, लेकिन गंभीर हालत में भर्ती युवती को समय पर एक यूनिट खून तक नहीं मिल सका। इलाज के इंतजार में उसकी मौत हो गई।
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
परिजनों का आरोप है कि दीपिका की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी, बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन रक्त उपलब्ध कराने के बजाय डोनर लाने की शर्त पर अड़ा रहा। पिता बेटी की जान बचाने के लिए रक्तदाता की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे, जबकि अस्पताल के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त मौजूद था। इसी बीच युवती ने दम तोड़ दिया।
मामले ने तूल पकड़ा तो कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई। जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन और ब्लड बैंक से जुड़े कर्मचारियों की ओर से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से गंभीर लापरवाही की पुष्टि की है।
8 कर्मचारियों को नोटिस, सख्त कार्रवाई की मांग
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला अस्पताल के आठ स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। प्रशासन ने संबंधित कर्मचारियों से पूछा है कि उपलब्ध रक्त होने के बावजूद मरीज को समय पर रक्त क्यों नहीं दिया गया और उपचार प्रक्रिया में ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई।
हालांकि कार्रवाई के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ है। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। सवाल यह है कि यदि जांच में लापरवाही साबित हो चुकी है और एक मरीज की जान चली गई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला सिर्फ एक मरीज की मौत का नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है और दीपिका के परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।



