बीजापुर। बस्तर में सलवा जुडूम अभियान के दौरान विस्थापित हुए पांच आदिवासी परिवारों की करीब 127 एकड़ पैतृक भूमि पर कब्जे का मामला सामने आया है। इस जमीन पर रायपुर के एक उद्योगपति महेंद्र गोयनका के कथित कब्जे का आरोप लगाया गया है।
छत्तीसगढ़ में वक्फ संपत्तियों पर बड़ी कार्रवाई: 1843 लोगों को नोटिस, रायपुर में सबसे ज्यादा विवाद
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने इस पूरे प्रकरण को “सुनियोजित धोखाधड़ी” करार देते हुए सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
मंडावी ने प्रेसवार्ता में कहा कि भैरमगढ़ राहत शिविरों में रह रहे इन परिवारों की उपजाऊ जमीन को छलपूर्वक उद्योगपति के नाम करवा लिया गया, जबकि संबंधित भूस्वामियों को बिक्री या दस्तावेज़ीकरण की कोई जानकारी नहीं थी।
विधायक ने कहा कि सरकार को इन जमीनों की तुरंत वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए और मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करनी चाहिए।
जिन पांच परिवारों की जमीन पर कथित कब्जा हुआ है, वे हैं
- चेतन नाग (ग्राम धर्मा) – 12 एकड़
- घस्सू राम (ग्राम बैल) – 29 एकड़
- पीला राम (ग्राम बैल) – 18 एकड़
- लेदरी सेठिया (ग्राम छोटेपल्ली) – 40 एकड़
- बीरबल (ग्राम मरकापाल) – 10 एकड़
मंडावी ने आरोप लगाया कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” के दौरान बस्तर की जल-जंगल-जमीन की लूट बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अब उद्योगपतियों की नजर अबूझमाड़ से सटे उपजाऊ इलाकों पर है और यह आदिवासी अस्मिता पर सीधा हमला है।
विधायक के अनुसार, ग्राम धर्मा, बैल, छोटेपल्ली और मरकापाल के ये ग्रामीण सलवा जुडूम के समय राहत शिविरों में रह रहे थे। इसी दौरान, उनकी अनुपस्थिति में उनकी जमीनें कथित तौर पर चोरी-छिपे बेची गईं। जब ये परिवार अपने गांव लौटने की तैयारी करने लगे, तब उन्हें जमीन हड़पने की जानकारी मिली।
मंडावी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस आने वाले दिनों में जनआंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ पांच परिवारों का नहीं, बल्कि पूरे बस्तर के विस्थापितों के अधिकार और न्याय से जुड़ा सवाल है।



