लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद। देवभोग ब्लॉक मुख्यालय से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आई है — विलुप्तप्राय वन्यजीव सालखपरी (पैंगोलिन) की तस्करी का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। देवभोग पुलिस ने ओडिशा से आई एक कार को रोककर उसकी डिक्की से जिंदा सालखपरी बरामद की है। इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
भाजपा सरकार के अनुकूल चुनावी ज़मीन तैयार करने की कवायद है SIR – कांग्रेस
देवभोग थाना क्षेत्र के खुटगांव चेकपोस्ट पर पुलिस ने सफेद रंग की मारुति K10 कार को जांच के लिए रोका। तलाशी के दौरान जब डिक्की खोली गई तो बोरी में रखे करीब 9 किलो वज़नी जिंदा सालखपरी को देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए।
पुलिस ने मौके से तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है — जिनमें दो ओडिशा निवासी और एक स्थानीय सहयोगी शामिल हैं।
पूछताछ में आरोपियों के पास से एक बाइक और लगभग 6 किलो सालखपरी की छाल भी बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 11 लाख 70 हजार रुपए बताई जा रही है।
थाना प्रभारी देवभोग ने बताया –
“सूचना मिलने पर विशेष टीम गठित की गई थी। चेकिंग के दौरान संदिग्ध वाहन से जिंदा सालखपरी और छाल बरामद हुई है। तीनों आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39 और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।”
सूत्रों के अनुसार, गिरोह इन वन्यजीव अंगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की योजना बना रहा था।
गौरतलब है कि सालखपरी (पैंगोलिन) को दुनिया का सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला जीव माना जाता है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है, और इसका शिकार या व्यापार गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
देवभोग पुलिस की यह कार्रवाई वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क पर कड़ा प्रहार मानी जा रही है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि जिंदा सालखपरी और उसकी छाल को कहां भेजा जाना था और इसके पीछे और कौन लोग शामिल हैं।
“देवभोग पुलिस की सतर्कता से बच गया एक विलुप्तप्राय प्राणी — लेकिन सवाल यह है कि जंगलों से शहरों तक तस्करी का यह जाल आखिर कितना गहरा है?”



