RNN ब्यूरो रिपोर्ट
रायपुर : छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। आदिवासी युवक रामचंद मरकाम ने न्याय न मिलने पर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर सलाह मांगी है। उसने पूछा है कि जब उसकी शिकायत पर 1 साल 8 महीने बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई, जबकि गैर-आदिवासी की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो जाती है, तो वह क्या करे — आत्महत्या या मर्डर?

युवक का आरोप है कि कुछ सामान्य वर्ग के लोगों ने उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया और पुलिस उनके पक्ष में खड़ी है। उसने पुलिस, एसपी और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
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रामचंद ने अपने पत्र में लिखा है — “मैं संविधान में विश्वास रखने वाला आदिवासी हूं, लेकिन लगातार अन्याय और उपेक्षा ने मुझे मानसिक रूप से तोड़ दिया है।”
यह मामला प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही और आदिवासी उत्पीड़न को लेकर नई बहस खड़ी कर रहा है।



