कांकेर (पखांजूर)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम पंचायत विष्णुपुर (पीवी-101) में शादी-सम्बंधी परंपरा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र से विवाहिता के सैकड़ों ग्रामीण और रिश्तेदार दामाद के घर पर पिछले दो दिनों से डेरा डाले हुए हैं। पुलिस और पंचायत मध्यस्थता के प्रयास कर रहे हैं, पर मामला अब भी अटका हुआ है।
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मामला क्या है?
ग्राम विष्णुपुर निवासी प्रभाष विश्वास (26) ने तीन साल पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के भूमकाम गाँव की अलीशा पोटामी (25) से प्रेम विवाह किया था। दम्पति ने कोर्ट में शपथ पत्र के माध्यम से शादी दर्ज कराई थी। शादी के बाद पहली बार अलीशा जब अपने ससुराल आईं, तो लड़की पक्ष ने परंपरा निभाने की शर्त पर अड़चनों की झड़ी लगा दी।

परंपरा की माँगें—किस बात पर विवाद?
गढ़चिरौली के आदिवासी समाज की रीत के मुताबिक, अगर कोई युवती बाहरी समाज (विभिन्न समुदाय/प्रदेश) में शादी करती है तो दामाद को समाज के समक्ष मुर्गा-बकरा भात खिलाना और दंड स्वरूप सामग्री/राशि देनी होती है। लड़की पक्ष का कहना है कि दामाद को करीब 2 लाख रुपए के सामान/दंड के रूप में देना अनिवार्य है — और तब तक वह लौटेंगे नहीं।

लड़की पक्ष के साथ लगभग 45 गांवों के लोग बोरिया-बिस्तर, राशन और बर्तन लेकर आए हुए हैं और वे फिलहाल ग्राम स्कूल में ठहरे हैं। कुल मिलाकर विरोध में लगभग 500 लोग मौजूद बताए जा रहे हैं।
दामाद-परिवार की पेशकश और गतिरोध
प्रभाष के परिवार ने शुरुआती रूप से 30 हजार रुपए की पेशकश की, जिसे लड़की पक्ष ने अस्वीकार कर दिया। दोनों पक्षों के बीच यह मुख्य अड़चन बनी हुई है, जिस कारण मामला वहीं अटका हुआ है।
पुलिस और सरपंच का रुख
स्थानीय सरपंच ने माहौल बिगड़ने की आशंका के बाद पुलिस को सूचित किया। बांदे थाना प्रभारी मनीष नेताम ने बताया कि दोनों पक्षों की बैठकें चल रही हैं और फिलहाल कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। पंचायत और पुलिस मध्यस्थता कर स्थिति शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं।
युवती का बयान और महाराष्ट्र पुलिस की जांच
घटना में मोड़ तब आया जब युवती के परिजनों ने महाराष्ट्र के कसनसूर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई पर जब जांच की गई तो अलीशा का बयान लिया गया, जिसमें उसने कहा – “मैंने अपनी मर्ज़ी से शादी की है और मैं अपने पति के साथ रहना चाहती हूँ।”
महाराष्ट्र पुलिस ने यह बयान दर्ज कर वापस लौट ली, पर समाज के लोग अब भी अपनी रीति-रिवाज पूरा कराए बिना वापस जाने को तैयार नहीं हैं।
वर्तमान स्थिति
बारिश और असुविधा के बावजूद ग्रामीण स्कूल परिसर में डटे हुए हैं और मांग पर अड़े हैं। पंचायत, पुलिस और समुदाय मिलकर समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं ताकि समस्या शांति पूर्वक हल हो सके।



