पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर में न्यायिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ाती एक बहुत भयावह और सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजधानी रायपुर के महिला व्यवसायी अनुसुइया साहू के साथ हुए फर्जीवाड़े का घटनाक्रम रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN 24 न्यूज चैनल की टीम ने खुलासा किया था। इसे घटनाक्रम में आरोपी ओमप्रकाश श्रीवास्तव की जमानत को रद्द करने के लिए जहां स्वयं बोधघाट थाने ने बस्तर में माननीय सेशन कोर्ट में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया था वहां शासकीय लोक अभियोजक की जिम्मेदारी थी की माननीय न्यायालय में पुलिस के पक्ष और विवेचना को कानूनी पहलुओं से मजबूती से रखें।

पंरतु बस्तर के शासकीय अधिवक्ता उल्टी गंगा बहा रहे हैं। ए.जी.पी. प्रतिमा राय खुले रूप में पीड़ित पक्ष से ही 50,000 की रिश्वत की मांग कर रही है। पहले न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करने के नाम पर 6000 रुपए ऐंठ लिए फिर जमानत की शर्तों के उल्लंघन पर जमानत खारिज कराने के लिए गृहमंत्री विजय शर्मा और शासकीय लोक अभियोजक सपन देवांगन के नाम पर 50,000 की मांग करने लगी। क्योंकि शासन का लोक अभियोजन विभाग राज्य के गृह मंत्रालय के आधीन कार्य करता है इसलिए सीधे गृहमंत्री के नाम पर ही रिश्वत की मांग की गई।
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इस मामले में रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल की टीम ने भी एक.जी.पी. प्रतिमा राय से फोन पर बात की उन्होंने सीधे हमसे ही पैसों की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि सरकारी वकील की फीस ही 50,000 रुपए है आप पहले 20,000 हजार रुपए भेजिए फिर मैं न्यायालय में पक्ष रखूंगी। इस पूरे मामले में हमने तत्काल गृहमंत्री विजय शर्मा के निज सचिव को सूचित किया और कार्यवाही की मांग की।

इसमें एक दूसरा पहलू भी है की बस्तर के ही वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद विश्वकर्मा से जब पीड़िता अनुसुइया साहू ने संपर्क किया तो उन्होंने मामले की गंभीरता को समझा और अपनी जोरदार कानूनी दलीलों से आरोपी ओमप्रकाश श्रीवास्तव की जमानत को ख़ारिज़ करा दिया। आरोपी ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने जमानत की सभी शर्तों का उलंघन किया था। मामले से जुड़े गवाहों को ना सिर्फ लगातार धमकाया जा रहा था बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति भी की जा रही थी।

इस पूरे मामले में बोधघाट थाने में पुलिस द्वारा तीन अपराध आरोपी ओमप्रकाश श्रीवास्तव पर पंजीबद्ध किया है। सबसे पहले 10 जनवरी 2025 को बी.एन.एस. की धारा 318(4), 316(4) फिर 19 अगस्त 2025 को बी.एन.एस. की धारा 296, 351(2) और उसके बाद 5 सितंबर 2025 को बी.एन.एस. की धारा 296, 115(2), 351(2) और 25,27 आर्म्स एक्ट। अंततः बोधघाट पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद विश्वकर्मा की दलीलों से माननीय न्यायालय ने आरोपी ओमप्रकाश श्रीवास्तव की जमानत को ख़ारिज़ कर दिया।

यह ना सिर्फ शासन बल्कि न्याय व्यवस्था के लिए भी शर्मनाक है। अब देखने वाली बात यह होगी की गृहमंत्री विजय शर्मा और गृह मंत्रालय इसपर क्या कठोर कदम उठता है या फिर तंत्र की इसमें मौन स्वीकृति है?



