कबीरधाम। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के वनांचल इलाकों में कथित धर्मांतरण को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। 18 गांवों के ग्रामीणों ने क्षेत्र में धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखी। ग्रामीणों ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
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‘आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाने का आरोप’
ग्रामीणों का आरोप है कि वनांचल क्षेत्र में रहने वाले कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर और अशिक्षित हैं। उनका दावा है कि विशेष रूप से आदिवासी, बैगा और अन्य समाज के लोगों को कथित तौर पर प्रलोभन देकर या गुमराह कर उनकी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इस गतिविधि में बाहरी मिशनरियों के साथ गांव के कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय हैं, जो पहले धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नामों की सूची लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण
ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने कथित धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल शासकीय और गैर-शासकीय लोगों के नामों की सूची भी प्रशासन को सौंपने का दावा किया है। उन्होंने मांग की कि सूची में शामिल लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी तरह का कानून उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने क्षेत्र में संचालित बताए जा रहे चर्च और अन्य धार्मिक गतिविधियों की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कहीं बिना अनुमति या नियमों के विपरीत गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो प्रशासन को उनकी जांच करनी चाहिए।
‘मामला हमारी सामाजिक पहचान से जुड़ा’
ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ धर्म परिवर्तन का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से वनांचल के गांवों में चल रही गतिविधियों की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि जांच में दबाव, प्रलोभन या धोखाधड़ी के जरिए धर्म परिवर्तन कराने की बात सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन के सामने ग्रामीणों की शिकायत पहुंचने के बाद इस मामले में जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।




