रायपुर। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार आमतौर पर सोना-चांदी, आभूषण और नए बर्तन खरीदने के लिए विशेष माना जाता है। लेकिन धनतेरस का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। इस पर्व का वास्तविक संदेश अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी शरीर और लंबी आयु की कामना से भी जुड़ा हुआ है। इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें भगवान विष्णु का स्वरूप, आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। यही वजह है कि धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी की पूजा-अर्चना करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि उनकी आराधना करने से परिवार में आरोग्य, सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
धन से भी अनमोल है स्वस्थ शरीर
आज के समय में धनतेरस को सोने-चांदी और बर्तनों की खरीदारी से जोड़कर देखा जाता है। बाजारों में इस दिन रौनक रहती है और लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार नई वस्तुएं खरीदते हैं। कई परिवारों में माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। हालांकि, इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्वास्थ्य की महत्ता को समझना भी है।
भारतीय संस्कृति में स्वस्थ शरीर को जीवन की सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक माना गया है। महाकवि कालिदास के संस्कृत महाकाव्य ‘कुमारसंभवम्’ का प्रसिद्ध कथन ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ इसी बात को स्पष्ट करता है। इसका भावार्थ है कि शरीर ही धर्म, कर्तव्य और जीवन के सभी महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने का प्रमुख साधन है।
यदि शरीर स्वस्थ है, तो व्यक्ति अपने परिवार, समाज और जिम्मेदारियों के प्रति बेहतर तरीके से योगदान दे सकता है। इसके विपरीत, बीमारी की स्थिति में धन-संपत्ति और दूसरी सुविधाओं का आनंद भी प्रभावित हो जाता है। इसलिए धनतेरस पर भगवान धनवंतरी की पूजा करते समय निरोगी जीवन की कामना को भी विशेष स्थान देना चाहिए।
धनतेरस पर ऐसे करें भगवान धनवंतरी की पूजा
धनतेरस के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई कर भगवान धनवंतरी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाकर पुष्प, अक्षत और स्वच्छ जल अर्पित करें। अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल एवं अन्य पूजन सामग्री भी चढ़ाएं।
इसके बाद भगवान धनवंतरी का ध्यान करते हुए परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, रोगों से मुक्ति और दीर्घायु की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान धनवंतरी मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
भगवान धनवंतरी का विशेष मंत्र
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः।’
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप कर भगवान धनवंतरी से आरोग्य और सुखमय जीवन का आशीर्वाद मांगा जा सकता है।
पूजा के साथ लें स्वस्थ जीवन का संकल्प
धनतेरस केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं, बल्कि अपने जीवन में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का अवसर भी है। इस दिन जरूरतमंदों को दवाइयां उपलब्ध कराने, बीमार लोगों की सहायता करने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लेना भी पर्व की भावना के अनुरूप है।
शाम के समय यमदीपदान की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर भगवान यमराज से परिवार की मंगलकामना की जाती है।
खरीदारी से ज्यादा महत्वपूर्ण है पर्व का संदेश
धनतेरस पर सोना-चांदी या नए बर्तन खरीदने की परंपरा प्रचलित है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्ति अपनी आर्थिक क्षमता और श्रद्धा के अनुसार खरीदारी कर सकता है। इस पर्व का महत्व महंगी वस्तुओं की खरीदारी से नहीं, बल्कि सकारात्मक संकल्प और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा है।
धनतेरस हमें याद दिलाता है कि जीवन में धन और संपत्ति जरूरी हैं, लेकिन स्वस्थ शरीर से बढ़कर कोई दूसरी पूंजी नहीं है। इसलिए इस बार भगवान धनवंतरी की पूजा करते हुए केवल धन-वैभव ही नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार के लिए निरोगी काया, उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद भी मांगें।




