दुर्ग। खुर्सीपार इलाके में वाहन जांच के दौरान जब्त किए गए 4 करोड़ रुपए नकद को वापस लेने की कारोबारी कमलेश आर. शाह की कोशिश को कोर्ट से झटका लगा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजली सिंह की अदालत ने रकम की सुपुर्दगी से संबंधित दोनों आवेदनों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में आयकर विभाग की जांच शुरू हो चुकी है, इसलिए जांच पूरी होने तक जब्त रकम कारोबारी को वापस नहीं की जा सकती।
सीक्रेट चेंबर से मिला था 4 करोड़ का कैश
मामला 25 अक्टूबर की रात का है। खुर्सीपार पुलिस को करीब 11 बजे सूचना मिली थी, जिसके बाद रायपुर-दुर्ग मुख्य मार्ग पर वाहनों की जांच शुरू की गई। इसी दौरान बोलेरो मैक्स पिकअप क्रमांक CG 04 QU 5996 को रोका गया। वाहन रायपुर से नागपुर की ओर जा रहा था।
जांच के दौरान पुलिस को पिकअप के पिछले हिस्से में बदलाव नजर आया। तलाशी लेने पर वहां एक गुप्त चेंबर मिला। इसे खोलने पर 500, 200 और 100 रुपए के नोटों में कुल 4 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए।
पुलिस के मुताबिक, वाहन में भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे सवार थे। डाभी वाहन चला रहा था। रकम से संबंधित दस्तावेज और हिसाब मांगे जाने पर पुलिस संतुष्ट नहीं हुई, जिसके बाद BNSS की धारा 106 के तहत वाहन और नकदी को जब्त कर लिया गया।
कारोबारी ने फर्म की रकम होने का दिया दावा
जब्त रकम की वापसी के लिए कमलेश आर. शाह ने अधिवक्ता राकेश पुरी के माध्यम से अदालत में आवेदन लगाया। उनका दावा है कि यह रकम उनकी पत्नी नीना शाह की फर्म मेसर्स मेक टेक (M/S MECTEC) से संबंधित है। फर्म कृषि क्षेत्र से जुड़ा कारोबार करती है और उद्योग आधार तथा केंद्रीय भंडार में पंजीकृत है।
आवेदन में बताया गया कि फर्म का सालाना कारोबार करोड़ों रुपए का है और नियमित रूप से टैक्स का भुगतान किया जाता है। कारोबारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में फर्म ने 1 करोड़ 8 लाख 22 हजार 242 रुपए आयकर जमा किया था। वहीं 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट में फर्म के पास नकद और बैंक खातों में कुल 53 करोड़ 93 लाख 69 हजार 148.72 रुपए दर्शाए गए हैं।
कमलेश शाह ने बताया कि 12 अक्टूबर 2025 को पत्नी के निधन के बाद अकोला कोर्ट ने उन्हें कानूनी वारिस घोषित किया। उनकी बेटियां खुशबू और खुशाली भी कारोबार की कानूनी वारिस हैं। फिलहाल तीनों मिलकर फर्म का संचालन कर रहे हैं और नागपुर में भी इसका एक कार्यालय है।
पुलिस के सामने रकम के मालिकाना हक को लेकर अलग-अलग दावे
कारोबारी की ओर से अदालत में कहा गया कि व्यापारिक गतिविधियों के चलते फर्म की रकम को समय-समय पर एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाया जाता है। 25 अक्टूबर को भी जेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की गाड़ी के जरिए रायपुर से नागपुर 4 करोड़ रुपए भेजे जा रहे थे।
वहीं पुलिस और आयकर विभाग ने रकम लौटाने का विरोध किया। उनका कहना था कि वाहन से पकड़े गए दोनों व्यक्तियों ने शुरुआती पूछताछ में रकम को जेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन और जय श्री गोल्डन मार्केट, भनपुरी रायपुर के ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़ा बताया था। बाद में कमलेश शाह की ओर से इसे मेक टेक फर्म की रकम बताया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, बयानों में अंतर होने के कारण रकम के वास्तविक मालिक और उसके स्रोत की जांच जरूरी है। पुलिस ने यह भी कहा कि कमलेश शाह की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि वाहन में मौजूद दोनों व्यक्ति उनके कर्मचारी थे या उन्हें 4 करोड़ रुपए ले जाने की अधिकृत अनुमति दी गई थी।
आयकर विभाग ने शुरू की जांच
आयकर विभाग ने कोर्ट को बताया कि मामले में आयकर अधिनियम की धारा 132A समेत संबंधित प्रावधानों के तहत जांच शुरू की गई है। विभाग ने जांच पूरी होने तक रकम किसी व्यक्ति को सौंपे जाने का विरोध किया।
कमलेश शाह की ओर से यह आशंका भी जताई गई थी कि लंबे समय तक रकम पुलिस के पास रहने से नोट खराब हो सकते हैं या उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए रकम वापस करने की मांग की थी। साथ ही आग्रह किया था कि अदालत की अनुमति के बिना रकम किसी अन्य विभाग या अधिकारी को न सौंपी जाए और न ही स्थानांतरित की जाए।
कोर्ट ने दोनों आवेदन किए खारिज
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजली सिंह ने कारोबारी के दोनों आवेदन खारिज कर दिए। कोर्ट ने कहा कि मामले में आयकर विभाग की जांच शुरू हो चुकी है और जांच पूरी होने तक 4 करोड़ रुपए की जब्त रकम कारोबारी को वापस नहीं की जा सकती।
अदालत ने रकम को किसी अन्य विभाग को ट्रांसफर नहीं करने की मांग वाला आवेदन भी स्वीकार नहीं किया। इस तरह फिलहाल 4 करोड़ रुपए की नकदी जांच पूरी होने तक जब्ती की स्थिति में ही रहेगी।




