जांजगीर-चांपा। जांजगीर के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने रास्ता रोककर मारपीट और लूटपाट करने के मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 14-14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों आरोपियों पर अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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अदालत ने मामले में दीपक कश्यप उर्फ पिंटू (24), पिता लव कुमार कश्यप, कोमल कश्यप (21), पिता गेंदराम कश्यप और राहुल कुमार निर्मलकर (22), पिता छतराम निर्मलकर को दोषी माना है। घटना 15 दिसंबर 2024 की रात करीब 8.30 बजे की है।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
धारा 309(4) बीएनएस: 14 वर्ष का कठोर कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना।
धारा 309(6) बीएनएस: 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना।
धारा 126(2) बीएनएस: 1 माह का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना।
अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है।
क्लिनिक से घर लौट रहे थे पीड़ित
अभियोजन के अनुसार, पीड़ित केशव करियारे ग्राम कोटाडबरी में क्लिनिक चलाते हैं। घटना की रात वह बाइक से अपने घर लौट रहे थे। उनके पास रेक्सीन के बैग में 50 हजार रुपए नकद थे।
जब वह कमरीद राइस मिल के पास पहुंचे, तभी बाइक सवार तीन युवकों ने उनका रास्ता रोकने का प्रयास किया। डर के कारण केशव ने बाइक तेज कर दी। इसके बाद पिलारी नहर के पास आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और बेल्ट से मारपीट शुरू कर दी। मारपीट के दौरान वह बाइक से गिर गए।
खेत में घसीटकर की बेरहमी से पिटाई
आरोपियों ने केशव को सड़क से घसीटकर पास के खेत में ले गए। वहां गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और घूंसे, लात तथा बेल्ट से जमकर मारपीट की। आरोपियों ने उनका हेलमेट उतारकर उसी से सिर पर वार किया, जिससे हेलमेट भी टूट गया।
मारपीट में केशव के माथे, सिर, नाक, छाती, पीठ और पैरों में गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा। इसके बाद आरोपी 50 हजार रुपए से भरा बैग और मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए।
घायल केशव किसी तरह पास के अंजली पेट्रोल पंप पहुंचे और परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद उन्हें बीडीएम अस्पताल, चांपा में भर्ती कराया गया।
पहचान परेड में हुई आरोपियों की पहचान
घटना की शिकायत पीड़ित के भाई बजरंग करियारे ने थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस की विवेचना के दौरान कराई गई पहचान कार्रवाई में पीड़ित ने दीपक कश्यप, कोमल कश्यप और राहुल कुमार निर्मलकर की पहचान की।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने प्रकरण न्यायालय में पेश किया। मामले में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर ने पैरवी की। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
सभी साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर अदालत ने अपराध को गंभीर प्रकृति का मानते हुए तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।




