रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में उस समय जोरदार हंगामा मच गया, जब उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उल्लेख किया। इस पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और शोर-शराबे के बीच स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
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अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए विजय शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष अपनी ही बातों पर एकजुट नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को भी अपने भाषण के दौरान विधायकों से हाथ उठवाकर समर्थन लेना पड़ रहा है। शर्मा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन पंचायत मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने अपनी ही सरकार को पत्र लिखकर विभाग से अलग होने का निर्णय लिया था, क्योंकि उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था और प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में भी कई बाधाएं थीं।
गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने के बाद प्रदेश के गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है। उन्होंने दावा किया कि अब तक करीब 11 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है और प्रतिदिन लगभग 1,500 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाया और पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ नहीं मिल सका।
विजय शर्मा ने अपने संबोधन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), पीएससी भर्ती और कोयला प्रकरण जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार इन मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार और सुशासन को प्राथमिकता दे रही है।
अपने भाषण में गृह मंत्री ने घुसपैठ, धर्मांतरण और नक्सलवाद जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष को घेरते हुए कहा कि इन गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने बलौदाबाजार हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि घटना की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए और समाज विशेष को अनावश्यक रूप से विवाद में नहीं लाना चाहिए।
इसी दौरान विजय शर्मा ने अपने भाषण में राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कुछ राजनीतिक टिप्पणियां कीं, जिस पर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने सरकार से अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन में लगाए जाने वाले किसी भी आरोप के समर्थन में तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
देवेंद्र यादव के विरोध के दौरान सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने उनकी प्रतिक्रिया और बॉडी लैंग्वेज पर भी आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के सदस्य आमने-सामने आ गए और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। लगातार नारेबाजी और शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद विजय शर्मा ने अपना भाषण जारी रखते हुए कहा कि राज्य सरकार बस्तर क्षेत्र में शांति बहाली और नक्सलवाद के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, पीड़ितों को राहत पहुंचाने और पात्र बंदियों के मामलों की समीक्षा जैसे विषयों पर सरकार लगातार काम कर रही है।
गृह मंत्री ने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ विकास कार्यों को भी गति दी जा रही है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों का जीवन बेहतर हो सके।
अविश्वास प्रस्ताव पर हुई इस चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। राहुल गांधी के नाम पर शुरू हुआ विवाद कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही बाधित करने तक पहुंच गया। हालांकि, कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद बहस आगे बढ़ी और दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क सदन के सामने रखे।



