रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर लंबी और तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए कहा कि यह केवल विपक्ष का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की आवाज है। उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल के हर सप्ताह को जनता के साथ किए गए एक नए अन्याय, वादाखिलाफी और प्रशासनिक विफलता के रूप में देखा जाना चाहिए।
डॉ. महंत ने अपने संबोधन की शुरुआत लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि 1963 में आचार्य जे.बी. कृपलानी द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का स्वयं नेहरू ने स्वागत किया था। इसी प्रकार 1979 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने सदन में बहुमत की स्थिति कमजोर होने का आभास होते ही इस्तीफा देना उचित समझा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अविश्वास प्रस्ताव सत्ता को जवाबदेह बनाने का संवैधानिक माध्यम है।
संत पवन दीवान की कविता पर सदन में विवाद
अपने भाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने संत पवन दीवान की कविता का उल्लेख किया। कविता में छत्तीसगढ़िया समाज के स्वाभिमान और सहनशीलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन स्वाभिमान की कमी महसूस होती है। इस टिप्पणी पर मंत्री ओपी चौधरी और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के लोगों की भावना आहत होती है। जवाब में महंत ने स्पष्ट किया कि यह उनकी नहीं बल्कि संत पवन दीवान की रचना है और उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की मूल भावना को सामने रखना था।
हसदेव, जैतखाम और आदिवासी मुद्दों पर सरकार को घेरा
महंत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय सर्वसम्मति से हसदेव अरण्य में कोयला खदान आवंटन निरस्त करने का संकल्प लिया गया था, लेकिन नई सरकार बनने के तुरंत बाद जंगलों की कटाई शुरू करा दी गई। उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य केवल जंगल नहीं, बल्कि मध्य भारत का फेफड़ा और आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र है। उन्होंने हजारों पेड़ों की कटाई को प्रदेश की अस्मिता पर हमला बताया।
उन्होंने गुरु घासीदास बाबा के जैतखाम को नुकसान पहुंचाने की घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में समय पर कार्रवाई नहीं हुई, जिससे समाज में व्यापक नाराजगी फैली।
कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कोरिया जिले में महिला से दुष्कर्म के बाद हत्या, थाने में फरियादी की मौत, मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में दुष्कर्म और हत्या जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार आलोचना स्वीकार करने के बजाय विरोध को दबाने में लगी है।
उन्होंने अवैध रेत खनन, नशे के कारोबार, भू-माफिया, आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा, अबूझमाड़ में जंगल कटाई, भारतमाला परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और वन अधिकार पट्टों के वितरण में देरी जैसे मुद्दों को भी सरकार की विफलता बताया।
किसान, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर आरोप
महंत ने कहा कि प्रदेश के किसानों को धान खरीदी, जांच और भुगतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में हजारों किसान अपना धान बेचने से वंचित रह गए।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने स्कूलों के बंद होने, शिक्षकों की कमी, युक्तियुक्तकरण से उत्पन्न समस्याओं और पाठ्यपुस्तक निगम में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कहा कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों के हजारों पद रिक्त हैं। बस्तर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को निजी हाथों में सौंपे जाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति का भी उल्लेख किया।
महतारी वंदन, माइक्रो फाइनेंस और मनरेगा का मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महतारी वंदन योजना भाजपा सरकार की प्रमुख योजना है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना से मिलने वाली राशि का लाभ महिलाओं की बजाय शराब बिक्री को बढ़ावा देने में दिखाई दे रहा है।
उन्होंने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्ज से परेशान महिलाओं, मनरेगा कार्यों में कमी, प्रधानमंत्री आवास योजना की कथित अनियमितताओं और गरीब परिवारों की समस्याओं का भी जिक्र किया।
पर्यावरण और नक्सल मुद्दे पर भी उठाए सवाल
महंत ने नदियों में अवैध उत्खनन, उद्योगों से निकलने वाली राखड़, प्रदूषण, पशुओं की मौत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता जताई। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि निर्दोष आदिवासियों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
अजय चंद्राकर का पलटवार
अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र का प्रहरी होता है, लेकिन यह अविश्वास प्रस्ताव केवल औपचारिकता निभाने जैसा है। उन्होंने कहा कि जिनके अपने घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर पीएससी भर्ती, शराब, कोयला, भारतमाला, गोबर खरीद, वर्मी कम्पोस्ट, विद्युत शुल्क माफी, राजीव मितान क्लब, गोधन न्याय योजना, चंद्रखुरी आयोजन, आरक्षण, प्रधानमंत्री आवास, सेस राशि के उपयोग और कई योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
चंद्राकर ने कहा कि पिछली सरकार में प्रशासनिक निर्णय मंत्रिमंडल को विश्वास में लिए बिना किए जाते थे। उन्होंने पूर्व सरकार के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना, पंचायत व्यवस्था, टीएस सिंहदेव के पत्र, आरक्षण विधेयक, सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण, खेल आयोजन और बेरोजगारी के मुद्दों को भी उठाया।
साय सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
भाजपा विधायक ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार ने सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार की जांच शुरू की, पीएससी मामले में कार्रवाई की, धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाया, प्रधानमंत्री आवास योजना को गति दी, युवाओं के कौशल विकास पर काम किया और प्रदेश में रेलवे, सड़क तथा स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार शुरू किया है। उन्होंने कहा कि पांच नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं और समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है।
सदन में तंज और राजनीतिक बयानबाजी
बहस के दौरान कई बार माहौल हल्का भी हुआ। अजय चंद्राकर की टिप्पणी पर मंत्री रामविचार नेताम ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें कुछ दिन विपक्ष को प्रतिनियुक्ति पर दे देना चाहिए। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अजय चंद्राकर पहले भी विपक्ष की भूमिका निभाते रहे हैं। वहीं चरणदास महंत ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि वह पहले से ही उन्हें कुछ दिनों के लिए विपक्ष में आने का निमंत्रण देते रहे हैं।
अंत में अजय चंद्राकर ने कहा कि साय सरकार स्पष्ट विजन के साथ काम कर रही है और प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस विचार का उल्लेख किया कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा, जब शासक स्वयं को जनता का सेवक समझे।



