अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की तीन शाखाओं में सामने आई करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शंकरगढ़, कुसमी और रामानुजगंज शाखाओं में 30 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध लेन-देन और ऋण वितरण से जुड़े आरोपों की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने स्तर पर शुरू कर दी है।
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ईडी की जांच शुरू होने के बाद इस मामले से प्रभावित हजारों किसानों में न्याय की उम्मीद बढ़ गई है। लंबे समय से किसान बैंकिंग प्रक्रियाओं में गड़बड़ी और उनके नाम पर कथित रूप से फर्जी ऋण स्वीकृत किए जाने की शिकायत कर रहे थे।
किसानों के नाम पर ऋण, शिकायतों ने खोली परतें
जानकारी के अनुसार, सरगुजा संभाग के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में किसानों के नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण स्वीकृत किए जाने और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। करीब 500 किसानों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना ऋण प्रकरण तैयार किए गए तथा बैंकिंग नियमों का पालन नहीं किया गया।
किसानों का दावा है कि जब उन्हें बैंक रिकॉर्ड की जानकारी मिली तब उन्हें अपने नाम पर स्वीकृत ऋणों और खातों में हुई गतिविधियों का पता चला। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और जांच की मांग तेज हो गई।
सरकार ने अपनाई सख्त नीति
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार के हस्तक्षेप के बाद प्रभावित शाखाओं में खाद और बीज वितरण व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित किया गया है, जिससे किसानों को राहत मिली है।
एफआईआर और विभागीय कार्रवाई जारी
प्रकरण में संलिप्त बताए जा रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, ऋण स्वीकृति दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं।
आंदोलन की चेतावनी के बाद बढ़ी जांच
गौरतलब है कि बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में किसानों ने अपनी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी। किसानों का आरोप था कि लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही थी।
इस बीच स्थानीय पुलिस भी मामले की जांच में सक्रिय रही। पूर्व में पुलिस स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद कई अहम जानकारियां सामने आई थीं, जिससे जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
किसानों की निगाहें अब ईडी जांच पर
ईडी की जांच शुरू होने के बाद अब प्रभावित किसानों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। उनका मानना है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।
फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का परीक्षण कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



