रायपुर, 30 मई। CSMCL : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले के बाद अब छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में हुए कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। एसीबी-ईओडब्ल्यू द्वारा विशेष अदालत में पेश की गई चार्जशीट में दावा किया गया है कि सरकारी शराब दुकानों के संचालन से जुड़ी मैनपावर एजेंसियों को वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच लगभग 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार यह भुगतान कर्मचारियों के नाम पर ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त कार्य दिवस (एक्स्ट्रा वर्क डे) और सर्विस चार्ज के रूप में किया गया। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान निगम में कई प्रबंध निदेशक (एमडी) बदले, लेकिन भुगतान की व्यवस्था और कथित अनियमितताओं का सिलसिला जारी रहा।
अफसर बदले, सिस्टम नहीं बदला
चार्जशीट के मुताबिक, अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद क्रमशः राकेश मंडावी, जनक प्रसाद पाठक और महादेव कावरे को CSMCL का प्रबंध निदेशक बनाया गया। इसके बावजूद मैनपावर एजेंसियों को किए जा रहे अतिरिक्त भुगतान में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ।
एसीबी-ईओडब्ल्यू का दावा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की जांच एजेंसियों द्वारा शराब घोटाले की जांच के दौरान भी निगम में यह व्यवस्था जारी रही।
कैश बरामदगी से खुला मामला
इस कथित घोटाले की परतें 29 नवंबर 2023 को खुलनी शुरू हुईं, जब ईडी ने कार्रवाई कर 28.80 लाख रुपए नकद जब्त किए। जांच में सामने आया कि मैनपावर एजेंसियों से जुड़े चेक दिल्ली से एयर कुरियर के जरिए रायपुर भेजे गए थे।
चार्जशीट के अनुसार, अभिषेक सिंह और तिजऊराम निर्मलकर एयरपोर्ट से चेक लेकर आए और उसके आधार पर करीब 29.40 लाख रुपए नकद निकाले गए। इसमें से 60 हजार रुपए कार्यालय खर्च के लिए अलग रखे गए, जबकि शेष राशि कथित रूप से निगम से जुड़े अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी थी। हालांकि लाभांडी क्षेत्र में रकम सौंपे जाने से पहले ही ईडी ने कार्रवाई कर नकदी जब्त कर ली।
फर्जी क्लेम के जरिए करोड़ों का भुगतान ?
जांच एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों, अधिकारियों और मैनपावर एजेंसियों के प्रतिनिधियों से पूछताछ के दौरान यह आरोप सामने आया कि वर्ष 2019 से ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्य दिवस के नाम पर फर्जी दावे तैयार किए जा रहे थे। जांच में यह भी दावा किया गया है कि कई मामलों में कर्मचारियों को वास्तविक भुगतान नहीं हुआ, जबकि एजेंसियों को बड़ी रकम जारी कर दी गई।
2019 के टेंडर के बाद बदली व्यवस्था
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में CSMCL का गठन कर शराब दुकानों के संचालन को सरकारी नियंत्रण में लिया था। शुरुआत में मैनपावर एजेंसियों को केवल कर्मचारियों के वेतन, पीएफ, ईएसआईसी और सेवा शुल्क का भुगतान किया जाता था।
जांच में बताया गया है कि अगस्त 2019 में जारी नए टेंडर के बाद एजेंसियों को तीन वर्षों तक लगातार काम देने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त 12 माह का विस्तार देने का प्रावधान जोड़ा गया। इसके बाद ओवरटाइम और अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था बड़े पैमाने पर लागू हुई, जिसकी आड़ में कथित अनियमितताओं को अंजाम दिए जाने का आरोप है।
12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
मामले में एसीबी-ईओडब्ल्यू ने विशेष अदालत में 12 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट पेश की है। इनमें से 8 आरोपी वर्तमान में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला अब केवल शराब घोटाले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी शराब दुकानों के संचालन और वित्तीय प्रबंधन में कथित भ्रष्टाचार की एक नई परत के रूप में सामने आया है।



