रायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। बलौदाबाजार वनमण्डल अंतर्गत आयोजित “देवपुर समर कैंप 2026” के दौरान देवपुर जंगल में दुर्लभ “विशाल भारतीय गिलहरी” दिखाई देना प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
देवपुर समर कैंप के शुभारंभ दिवस 16 मई को आयोजित पक्षी अवलोकन भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने इस दुर्लभ वृक्षवासी गिलहरी को देखा, जिससे प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों में विशेष उत्साह देखा गया। वन विभाग के अनुसार किसी भी वन क्षेत्र में इस प्रजाति की उपस्थिति वहां के घने वृक्ष आवरण, संतुलित पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण मानी जाती है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखाई देने को प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के मजबूत आधार हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, प्रकृति शिक्षा और ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार गंभीरता से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को जंगल और प्रकृति से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी विकसित हो सके। देवपुर समर कैंप जैसे आयोजन इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस दुर्लभ गिलहरी की पहचान बलौदाबाजार के प्रकृति एवं पक्षी प्रेमी तथा साइबर जोखिम विशेषज्ञ श्री हेमंत वर्मा द्वारा की गई। उनके अनुसार यह प्रजाति सामान्य गिलहरियों की तुलना में आकार में काफी बड़ी होती है तथा इसके शरीर पर गहरे लाल, काले, भूरे और क्रीम रंगों का आकर्षक मिश्रण इसे अलग पहचान देता है।
वैज्ञानिक रूप से “रटूफा इंडिका” नाम से पहचानी जाने वाली यह प्रजाति भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में शामिल है। इसकी लंबाई पूंछ सहित लगभग तीन फीट तक हो सकती है। यह पूरी तरह पेड़ों पर रहने वाली प्रजाति है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लगभग 20 फीट लंबी छलांग लगाने की क्षमता रखती है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी वन क्षेत्र में इस प्रजाति की मौजूदगी वहां के स्वस्थ जंगल और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है। हालांकि जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवासों के विखंडन के कारण इसके अस्तित्व पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। भारत में यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-दो के अंतर्गत संरक्षित है।
वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य एवं आसपास के वन क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वन्यजीव अवलोकन लोगों को जंगलों के महत्व को समझने और संरक्षण के प्रति जागरूक होने का अवसर देते हैं।
उन्होंने बताया कि देवपुर समर कैंप के माध्यम से बच्चों, युवाओं और प्रकृति प्रेमियों को वन एवं वन्यजीवों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भविष्य में संरक्षण के प्रति जनसहभागिता और मजबूत होगी।