पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
छत्तीसगढ़/नई दिल्ली. “तो क्या धमतरी और बस्तर में विदेशी डेबिट कार्डो से निकाले गए पैसों की जानकारी और ईडी की कार्यवाही छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन के खुफिया विभाग और सूचना तंत्र की विफलताओं में एक गिना जाएगा ?” ये सिक्के का एक पहलू है इसका दूसरा पहलू यह है कि छत्तीसगढ़ के दूरदराज इलाकों सरगुजा और बस्तर को तो छोड़िए राजधानी रायपुर की घनी आबादी वाली बस्तियों सहित दुर्ग-राजनांदगांव सहित प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में भी धर्मांतरण का षड्यंत्र वर्षों से सुनियोजित तरीके से रचा जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से बस्तर के दर्जनों गांवों से मूल आदिवासी समाज और नव धर्मांतरित समूहों के बीच बड़ी मात्रा मे हिसंक झड़पों की खबरें आती ही रहती है। बस्तर में सूदूर वनांचल क्षेत्रों में जहां नक्सलवाद और उनका कैडर अपने चरमोत्कर्ष समय पर समानांतर सरकार चलाया करते थे और वहां फोर्स भी जानें से कतराती थीं, उन जगहों पर भी इसाई मिशनरीज अपने स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों के नाम पर भारी निर्माण और व्यय कर अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा दें रहीं थीं।

बस्तर में चित्रकोट जलप्रपात से बारसूर और दंतेवाड़ा जाने के लिए एक रोड है हाल ही के वर्षों में वो पक्की सड़क में तब्दील हुई है। ये पूरी सड़क घने जंगलों के बीचों-बीच है, दर्जनों किलोमीटर तक ना कोई इंसान दिखाई देता है ना ही कोई चौपहिया। वहां एक गांव है हाथी दरहा वो भी मुख्य सड़क से कुछ दूर जंगल की तरफ़ है। इससे लग कर दर्जनों वनग्रामों का इलाका है मरेंगा, बद्रेंगा, छोटे गुमाईपाल, मत्नर, कोदेर, लिमोपदर, लालगुदा, ऐर्वर टोपर, मत्नर, कुठार जैसे वनग्राम जिसमें आबादी दर्जनों और सैकड़ों से ज्यादा नहीं होगी। और ये इलाका कभी नक्सलियों के एक कैरिडोर के रूप में बताया जाता है जो छोटे डोंगर – दरभा (झीरम) – भैरमगढ – ओरछा का एक सेफ पैसेज हुआ करता था।

इसी हाथीदरहा में एक स्कूल स्थापित है जिसका नाम है ” CHRIST PUBLIC SCHOOL” अंग्रेजी माध्यम। और इस अंग्रेजी माध्यम स्कूल का मैनेजमेंट देखते हैं ” CMI FATHER’S” जो शायद ईसाई मिशनरियों की एक अनुसांगिक इकाई हो। और यह स्कूल पूरी तरह से एक बोर्डिंग स्कूल है जहां आदिवासी समाज के बच्चों को रख कर शिक्षा दी जाती है। मतलब साफ है कि छोटी उम्र में ही “ब्रेनवाश और धर्मांतरण” ?

हाल ही में राजधानी रायपुर के सालेम स्कूल का भी मामला सामने आया था कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की फीस के पैसों का दुरुपयोग अवैध धर्मांतरण और ईसाई मिशनरियों सहित चर्च के कार्यों में कर रहे है। इसी प्रबंधन द्वारा बिलासपुर के बीचों-बीच स्थित मिशन अस्पताल की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया था, जबकि वर्षों पूर्व शासकीय भूमि की लीज अवधि समाप्त हो गई थी। अवैध कब्जे और गैर कानूनी कार्यों की वजह से शासन-प्रशासन द्वारा उक्त कब्जे को ना सु बलपूर्वक खाली कराया गया था बल्कि इन गैरकानूनी कार्यों के कारण बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में अपराध भी पंजीबद्ध कराया गया था।

पिछले दिनों जनवरी में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के धर्मापुर गांव में 200 परिवारों के अवैध धर्मांतरण की तैयारीयों को पकड़ा गया था इसके लिए एक अवैध चर्च और आश्रम को ठिकाना बनाया गया था। छापेमारी के दौरान कई डिजिटल सबूत मिले थे जिनकी बाजार में कीमत हजारों डॉलर है मतलब साफ था कि विदेशी फंडिंग हासिल की गई थी।

पुलिस को छापेमारी के दौरान उस अवैध चर्च और आश्रम में सोलर आधारित प्रोजेक्टर्स, लैपटॉप, टैबलेट, आईपैड, प्रीमियम मोबाइल फोन, धर्मांतरण से संबंधित डिजिटल दस्तावेज, प्रेजेंटेशन सामग्री, महत्वपूर्ण रजिस्टर और फाइनेंशियल रिकॉर्ड मिलें थे। पुलिस ने बरामद सभी विदेशी समानों को जब्त कर लिया था। सोलर प्रोजेक्टर्स का प्रयोग विशेष रूप से सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रेनवाश के लिए किया जाता था जहां बिजली की सुविधा नहीं होती है।
अगले अंक में – “द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) , Truist Bank, Micah Mark और छत्तीसगढ़ में वर्षों से सुनियोजित धर्मांतरण का षड्यंत्र ?
छत्तीसगढ़ में ध्वस्त पुलिस मुख्यालय का खुफिया विभाग और सूचना तंत्र या वर्षों से सुनियोजित धर्मांतरण का षड्यंत्र…..3.?



