नई दिल्ली/तेहरान: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जहाजों से इस जलमार्ग से गुजरने पर कोई टोल टैक्स नहीं लिया जा रहा है और भविष्य में भी उन्हें सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा।
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दूतावास का बयान: रिश्तों पर भरोसा
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने दूतावास में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत और ईरान के संबंध मजबूत और भरोसेमंद हैं। उन्होंने कहा,
“आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने कोई शुल्क लिया है। इस कठिन समय में हमारे संबंध और भी मजबूत हुए हैं।”
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भारतीय जहाजों को आगे भी होर्मुज से सुरक्षित निकलने दिया जाएगा। जल्द ही जहाजों की आवाजाही को लेकर एक औपचारिक व्यवस्था भी घोषित की जाएगी।
अमेरिकी नाकेबंदी के बीच आया बयान
यह बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज जलमार्ग के आसपास नाकेबंदी का ऐलान किया है। सीजफायर के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि ईरान और ओमान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगा सकते हैं, लेकिन ईरान ने इन अटकलों को खारिज कर दिया।
होर्मुज में फंसे 15 भारतीय पोत
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार:
कुल 15 भारतीय ध्वज वाले/स्वामित्व वाले पोत होर्मुज क्षेत्र में फंसे हैं
इन्हें सुरक्षित वापस लाने के प्रयास जारी हैं
विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है
अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे, जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर कई देशों ने समर्थन नहीं दिया है:
ब्रिटेन ने खुलकर विरोध किया
जापान ने माइनस्वीपर तैनाती टाली
ऑस्ट्रेलिया ने कहा—कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली
वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की है कि फ्रांस और ब्रिटेन मिलकर होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
भारत के लिए क्या मायने
होर्मुज जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख रास्ता है। ऐसे में ईरान का यह फैसला भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान का यह रुख भारत के लिए राहतभरा संकेत है, हालांकि क्षेत्र में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।



