बिलासपुर । जिले में सर्पदंश से मौत के नाम पर बड़े पैमाने का घोटाला सामने आया है। मृतक परिवारों, वकीलों और डॉक्टरों के मिलीभगत से सरकारी खजाने से लगभग 70 लाख रुपये हड़प लिए गए।
राज्य शासन की कल्याणकारी योजना के तहत सर्पदंश से मौत पर परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। लेकिन कुछ बेईमानों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके इस योजना का दुरुपयोग कर 15 से ज्यादा फर्जी मामलों में भारी भरकम रकम वसूल ली।
जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में 17 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। एसएसपी रजनेश सिंह ने सात थानों के टीआई को डोर-टू-डोर जांच के निर्देश दे दिए हैं। थाना सरकंडा, सिटी कोतवाली, तोरवा और कोनी समेत कई थानों में मर्ग डायरी खोलकर सत्यापन शुरू कर दिया गया है।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने साफ कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं था। उन्होंने गांववालों से पूछताछ कर असली हकीकत जानने के निर्देश दिए हैं।
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में मामला उठाते हुए चौंकाने वाला आंकड़ा दिया — नागलोक तपकरा में एक साल में 100 से भी कम सर्पदंश के मामले दर्ज हुए, जबकि बिलासपुर जिले में अकेले 481 प्रकरणों में मुआवजा बांट दिया गया।
एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि अब तक तीन प्रकरणों में फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षर पाए जा चुके हैं। दोषी वकील, डॉक्टर और परिवारों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।



