नई दिल्ली: 14 फरवरी 2019 का पुलवामा हमला देश की स्मृतियों में आज भी ताजा है। वैलेंटाइन डे के दिन जम्मू-कश्मीर के लेथपोरा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ। 300 किलो से ज्यादा विस्फोटक से भरे वाहन की टक्कर में 40 जवान शहीद हो गए। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने जिम्मेदारी ली और इसके पीछे पाकिस्तान की आईएसआई का हाथ बताया गया। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया और आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति बदल दी।
बालाकोट एयरस्ट्राइक: कड़ा संदेश
पुलवामा हमला के सिर्फ 12 दिन बाद, 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश के बड़े प्रशिक्षण शिविर पर एयरस्ट्राइक की। 1971 के बाद पहली बार भारतीय विमानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर कार्रवाई की। यह कदम साफ संदेश था कि अब आतंक का जवाब निर्णायक तरीके से दिया जाएगा।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदलाव
हमले के बाद सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त कर दिया। इससे अलगाववादी ढांचे को बड़ा झटका लगा। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती से आतंकी भर्ती और ओवरग्राउंड वर्कर्स का नेटवर्क कमजोर हुआ। घाटी में आतंक का पारिस्थितिकी तंत्र काफी हद तक टूट गया।
पिछले सात वर्षों में कुछ घटनाएं जरूर हुईं, लेकिन हालात पहले से बेहतर हैं। विकास कार्य तेज हुए हैं और लोगों में भरोसा बढ़ा है। आज पुलवामा हमला सिर्फ एक त्रासदी नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ अटूट संकल्प का प्रतीक बन चुका है। देश हर साल शहीदों को नमन करते हुए यही संदेश दोहराता है—आतंक का अंत तय है।



