जगदलपुर। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गरीबों को छत देने का संकल्प दोहरा रहे हैं, तो दूसरी ओर जगदलपुर विकासखंड बकावंड में उसी सरकार के नाम पर चल रही योजनाओं को जमीनी स्तर पर रौंदा जा रहा है। यहां एक भाजपा समर्थित सरपंच ने सारी हदें पार करते हुए वन अधिकार पट्टाधारी विधवा महिला को बेघर करने की कोशिश की है।
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मामला बकावंड ब्लॉक की ग्राम पंचायत करपावंड का है, जहां सरपंच ने अपनी दबंगई दिखाते हुए विधवा महिला को मकान खाली करने का नोटिस थमा दिया। इतना ही नहीं, नोटिस के बाद सरपंच बुलडोजर लेकर महिला के घर तक पहुंच गया, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

पीड़ित महिला को जो मकान मिला है, वह शासन द्वारा स्वीकृत है और जिस भूमि पर मकान बना है, उसका वन अधिकार पट्टा भी वैध रूप से जारी किया गया है। शासन ने 0.03 हेक्टेयर भूमि का पट्टा वन अधिकार अधिनियम के तहत मनोहर सिंह पटेल के नाम पर आवंटित किया है। इसके बावजूद सरपंच ने उक्त भूमि को अवैध अतिक्रमण बताते हुए मकान तोड़ने की कोशिश की।
सरपंच की इस कार्रवाई के खिलाफ ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया, जिसके बाद मौके पर हंगामा हुआ और जेसीबी को बैरंग लौटना पड़ा। लेकिन डर और असुरक्षा के माहौल में जी रही पीड़ित महिला ने आखिरकार जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई।
महिला ने प्रशासन को बताया कि वह विधवा है, शासन की योजना के तहत उसे आवास और पट्टा मिला है, इसके बावजूद सरपंच लगातार उसे परेशान कर रहा है। उसने अपने और अपने बच्चों की जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।
बताया जा रहा है कि सरपंच ने महिला को जारी नोटिस में तीन दिन के भीतर मकान खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। सवाल यह है कि क्या किसी पंचायत सरपंच को शासन द्वारा जारी वन अधिकार पट्टे को अवैध घोषित करने का अधिकार है?



