पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़ : राजधानी रायपुर की सभी तहसीलों में न्याय बिकता है और इसकी बोली लगाकर ही फैसला सुनाया जाता है। छत्तीसगढ़ के अधिकांश राजस्व न्यायालयों में न्यायिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ाती अक्सर ही बहुत भयावह और सनसनीखेज मामले मिडिया रिपोर्ट द्वारा सामने आते रहते है। जहां बरसों तक कमजोर पीड़ित पक्ष न्यायालय में पेशी दर पेशी अपने हक और सबूतों के आधार पर फैसले का इंतजार करता है पंरतु पैसों के दम पर फैसलों को खरीद लिया जाता है।
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रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल ना सिर्फ निष्पक्ष समाचारों का संकलन करता है अपितु लोक कल्याण और आमजनों के हितों के लिए भी संघर्षरत रहता है। ऐसे ही दो मामलों में हमारी टीम राजस्व न्यायालयों में लगातार शासकीय भूमि और सार्वजनिक न्यास भूमि को भू-माफियों के चंगुल से आजाद करने के लिए संघर्षरत है पंरतु तहसीलदारों ने पैसों के सामने न्याययिक व्यवस्था को कुचल दिया है।
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केस -1 मई – जून 2025 में राजधानी रायपुर के पंडरी स्थित ग्राम सेवा सहकारी समिति की 12 एकड़ बेशकीमती जमीन पर भू-माफिया हरिवल्लभ अग्रवाल और स्वंभू ट्रस्टी अजय तिवारी के कब्जे और काले कारनामे को रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल की टीम ने खोल दिया था। जब लगातार जून 2025 से समाचार प्रकाशन और प्रसारण के बावजूद प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगी तो हमने न्यायालयीय व्यवस्था का दरवाजा खटखटाया। 7 अगस्त को रायपुर के तहसीलदार राममूर्ति दीवान के समक्ष रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल की टीम ने लिखित रूप से दल गठन कर सीमांकन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया।

जिस पर तहसीलदार राममूर्ति दीवान ने 18 अगस्त को विधिवत सीमांकन, प्रतिवेदन और दल गठन के लिए आदेश जारी किया और इसी दिनांक को हमे 3 राजस्व निरीक्षकों और 2 पटवारियों के दल गठन के साथ 15 सितंबर तक विधिवत सीमांकन कार्यवाही और स्पष्ट सीमांकन प्रतिवेदन न्यायालय तहसीलदार में प्रस्तुत करने का पत्र भी जारी कर दिया गया। 15 सितंबर तक कोई कार्यवाही नहीं हुई और 24 सितंबर को बगैर किसी पूर्व सूचना और ना ही भूमाफिया हरिवल्लभ अग्रवाल और स्वंभू ट्रस्टी अजय तिवारी के किसी न्यायालीन आदेश – पत्र – आवेदन – प्रस्तुत दलीलों के, स्वयं ही निर्णय कर तहसीलदार राममूर्ति दीवान ने आवेदन खारिज कर दिया। हम इस मामले में पक्षकार नहीं बल्कि शिकायतकर्ता थे और हमें इस मामले से कोई लाभ या हानि भी नहीं हो रही थी। यह तो सैकड़ों बुनकरों सहित उनके परिजनों की व्यथा थी जिसको सिर्फ हमने न्यायालयीय व्यवस्था के अंतर्गत उठाया था।


इस मामले में राजस्व निरीक्षक अजय ठाकुर को भी गठित दल के मुखिया के रूप में शामिल किया गया था। अजय ठाकुर ना सिर्फ राजस्व मामलों के काफी जानकार कर्मचारियों में शुमार है बल्कि काफी तेजतर्रार पटवारी रहें हैं। उन्होंने तहसीलदार राममूर्ति दीवान को लिखित आवेदन पत्र दिया कि पूर्व में इसी जमीन के सीमांकन के समय उन पर मनगढ़ंत आरोप लगाया गया था और उन्हें बहुत ज्यादा प्रताड़ित भी किया गया था अतः उन्हें इस दल से पृथक किया जाये। क्योंकि वो अच्छी तरह जानते थे कि तहसीलदार राममूर्ति दीवान उन पर अनैतिक कार्य का दबाव बनायेंगे और वो विधि विरुद्ध कोई भी निर्णय नहीं लेंगे। अजय ठाकुर का राजस्व विभाग में सालों का लंबा अनुभव है। वो दर्जनों तहसीलदारों के साथ काम चुके हैं जिनको बाद में अच्छी सेवा के लिए शासन द्वारा आईएएस अवार्ड भी हो गया है।

दरसल पूरा मामला राजधानी रायपुर में शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। इस बड़े मामले को हमारी टीम ने सामने लाया था। दरअसल ग्राम सेवा समिति की पंडरी स्थित 12 एकड़ भूमि का ये मामला भूमाफियाओं की काली करतूतों और मानवीय संघर्ष का एक मार्मिक चित्रण है। मंहत लक्ष्मीनारायण दास, नंदकुमार दानी, व्यंकटेशराव कोहाडे जैसे छत्तीसगढ़ के सपूतों ने 1948-49 में ग्राम सेवा समिति का गठन बुनकरों के कल्याण के लिए किया था। 1965 में इस जमीन को समिति के सदस्यों ने 19 नये पैसे प्रति फुट के हिसाब से खरीदा था।

पिछले दिनों समिति के बुनकरों ने रायपुर संभाग आयुक्त से शिकायत की थी कि स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी ने भूमाफिया हरिबल्लभ अग्रवाल को यह भूमि बेच दी है, जिस पर अवैध कॉलोनी बनाई जा रही है और लगभग 50 वर्षों से निवास कर रहे बुनकरों के परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा है। बुनकरों का आरोप है कि अजय तिवारी, जिसका इस भूमि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है, उन्होंने हरिबल्लभ अग्रवाल के साथ मिलकर उन्हें बेदखल करने की साजिश रची है। बुनकरों के अनुसार उनके घरों के आसपास अवैध रूप से सड़कें बनाई जा रही हैं, बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जा रहे हैं, ताकि वे अपना घर छोड़कर चले जाएं। इस मामले में पीड़ितों ने अपनी व्यथा बहुत ही मार्मिक पीड़ा के साथ व्यक्त की थी।

समाचार संकलन में हमारी टीम ने बुनकरों के पक्ष को सही पाया था। लगातार समाचार के प्रकाशन और प्रसारण के बावजूद जब प्रशासक के कानों में जूं तक नहीं रेंगी तो हमारी टीम ने इस पर खुद न्यायालयीन व्यवस्था के माध्यम से समाधान शुरू किया है। परंतु तहसीलदार राममूर्ति दीवान ने बगैर किसी सुनवाई के पूरे मामले को ही ख़ारिज़ कर दिया। कारण आप स्वयं समझ सकते हैं।
“यक्ष प्रश्न क्या गौरव रायपुर के गौरव को बचा पायेंगे ? क्रमशः पार्ट – 2



