मुंगेली: जिले के ग्राम लोकईपुर में शासकीय घास भूमि पर अवैध कब्जे का मामला आर-पार पर पहुंच गया है। कलेक्टर न्यायालय ने 9 जुलाई 2025 को ही जमीन को सरकारी घोषित कर निजी दावे को खारिज कर दिया था, लेकिन चार महीने बाद भी राजस्व विभाग ने बेदखली नहीं की। नाराज मांझी अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक संगठन ने चक्का जाम की चेतावनी दी है। मामला ग्राम पंचायत घुटेली आश्रित ग्राम लोकईपुर का है। यहां खसरा नंबर 34/1, 108/1, 108/5 की करीब 4 एकड़ जमीन घास मद में दर्ज है और छ.ग. शासन के नाम पर है। रिखीसिंह और पद्मराज सिंह ने इसे अपनी पुश्तैनी जमीन बताकर कलेक्टर कोर्ट में धारा 57(2) के तहत आवेदन लगाया था।
कलेक्टर न्यायालय ने प्रकरण में 9 जुलाई 2025 को आदेश दिया कि SDM मुंगेली की जांच रिपोर्ट के मुताबिक मिसल बंदोबस्त में नाम जरूर था, लेकिन अधिकार अभिलेख 1954-55 से ये जमीन लगातार शासकीय घास के रूप में दर्ज है। समय पर चुनौती नहीं देने के कारण आवेदन सारहीन मानकर खारिज कर दिया गया। पुन्नी राम मरकाम ने मीडिया को बताया
संगठन 5 साल से कागजों की लड़ाई लड़ रहा है। कलेक्टर का आदेश होने के बाद भी निचले अधिकारी पालन नहीं कर रहे हैं। तहसीलदार सिर्फ आश्वासन देते हैं, SDM ने भी आधे घंटे देखकर छोड़ दिया।
संगठन का कहना है कि ये घास भूमि गांव के चारागाह, श्मशान घाट, महामाया और ठाकुर देव की पूजा के लिए है, लेकिन अवैध कब्जेधारियों ने उस पर धान की फसल बो दी है। संगठन ने 28 सितंबर 2026 को SDM को पत्र देकर मांग की है कि शासन फसल को अपने कब्जे में ले, नहीं तो आदिवासी संगठन आगे चलकर वे खुद हार्वेस्टर से काटेंगे।
कलेक्टर के आदेश से जमीन सरकारी साबित हो चुकी है, लेकिन मैदान पर कब्जा आज भी अवैध कब्जेधारियों का ही है।* अब देखना है कि चेतावनी के बाद राजस्व विभाग बेदखली अमल में लाता है या फिर मामला और बड़ा आंदोलन बनता है?




