धमतरी, 05 जुलाई। Justice : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में चरित्र संदेह के चलते पत्नी की निर्मम हत्या कर शव को जलाकर पहचान मिटाने वाले चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश अर्चना भास्कर की अदालत ने पति मनराखन नेताम और उसके भतीजे रामदेव सलाम को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
करीब दो साल पहले मिले अधजले शव की गुत्थी सुलझने के बाद अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच में जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी माना। अदालत ने हत्या जैसे जघन्य अपराध को गंभीर बताते हुए कड़ी सजा सुनाई।
हत्या के बाद शव जलाकर मिटाने की कोशिश
यह मामला 8 फरवरी 2024 का है। दुगली थाना क्षेत्र के ग्राम भोभलाबाहरा में सीसी रोड किनारे एक अज्ञात महिला का अधजला शव मिला था। पोस्टमार्टम में सिर और पेट पर गंभीर चोटों के साथ गला काटे जाने के साक्ष्य मिले। हत्या के बाद शव को आग लगाकर पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी।
जांच में सामने आई पूरी साजिश
पुलिस ने आसपास के जिलों में दर्ज गुमशुदगी की जांच की, जिसके बाद शव की पहचान कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर निवासी जयंत्री बाई के रूप में हुई। जांच में खुलासा हुआ कि पति मनराखन नेताम ने अपने भतीजे रामदेव सलाम के साथ मिलकर चरित्र संदेह के चलते पत्नी की हत्या की और बाद में शव को जला दिया।
इन धाराओं में हुई सजा
अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 302/120-बी के तहत आजीवन कारावास, जबकि धारा 201/120-बी के तहत 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 1,200-1,200 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दो वर्ष छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
साक्ष्य बने सबसे बड़ा आधार
अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और जांच से जुड़े दस्तावेज अदालत में निर्णायक साबित हुए। इन्हीं के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।



