धमतरी, 23 जून। Jal Jungle Zameen : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार को उस वक्त बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला, जब वनांचल क्षेत्र के 45 गांवों के हजारों आदिवासी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, बिजली समेत सात बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति धमतरी-गरियाबंद के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

प्रदर्शनकारी शांति घाट से करीब 10 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से गुजरकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। ग्रामीण अपने साथ राशन-पानी भी लेकर पहुंचे थे। उनका कहना था कि मांगें पूरी नहीं होने तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
‘नरक से बदतर जिंदगी जी रहे हैं ग्रामीण’
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके गांवों में आज भी सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, अस्पताल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से विकास की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
महिलाओं ने बताया कि जंगल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में प्रसव के दौरान कई बार मां और नवजात की जान खतरे में पड़ जाती है। वहीं बच्चे कीचड़ और दुर्गम रास्तों से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
प्रशासन पर लगाए रोक-टोक के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने प्रदर्शन रोकने के लिए नगरी और आसपास के पेट्रोल पंपों को दोपहर तक बंद करा दिया तथा डीजल की बिक्री पर रोक लगाई। इसके बावजूद हजारों ग्रामीण धमतरी की ओर बढ़ते रहे।
बनरौद के पास पुलिस-प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर सड़क पर ट्रक खड़े किए, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं रुके। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, फिर भी भीड़ आगे बढ़कर कलेक्ट्रेट पहुंच गई।
350 से अधिक पुलिस जवान तैनात
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने रायपुर रेंज से 350 से अधिक पुलिस जवान बुलाए थे। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

कलेक्टर ने दिया आश्वासन
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने बताया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जबकि कुछ सड़कों के निर्माण के लिए स्वीकृति लेने की कार्रवाई जारी है। आश्वासन के बाद ग्रामीण अपने-अपने गांव लौट गए।


