नई दिल्ली। देश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और आगामी रणनीति को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार बैठक में गठबंधन के 23 राजनीतिक दलों ने भाग लेने की पुष्टि की है।
जयराम रमेश ने बताया कि कुछ दल अपने-अपने कारणों से इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे, लेकिन उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली का विरोध जारी रखने की बात कही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि गठबंधन साझा उद्देश्य और स्पष्ट इरादों के साथ एकजुट है तथा सभी दलों के बीच समन्वय बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार को घेरने की बनेगी रणनीति
बैठक में केंद्र की मोदी सरकार को विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर घेरने के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी। विपक्षी दल महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, संविधान से जुड़े मुद्दों और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। साथ ही वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की कार्ययोजना पर भी मंथन होगा।
गठबंधन में शामिल होंगे ये दल
बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार गुट), सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी, फारवर्ड ब्लॉक, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, वीसीके, भाकपा (माले), एमडीएमके, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, केरल कांग्रेस, वीआईपी पार्टी, केरल कांग्रेस (मणि), भारत आदिवासी पार्टी और लोकदल शामिल होंगे।
कुछ सहयोगी दलों में दिख रही नाराजगी
बैठक ऐसे समय में हो रही है जब गठबंधन के कुछ घटक दलों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। डीएमके ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर बैठक से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। वहीं माकपा ने केरल में कांग्रेस नेताओं द्वारा वाम दलों और भाजपा के बीच कथित मिलीभगत संबंधी बयानों पर नाराजगी जताई है।
सूत्रों के अनुसार, माकपा महासचिव एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। इसके बावजूद विपक्षी दलों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ उनकी एकजुटता कायम है।
बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच बढ़ी बैठक की अहमियत
हालिया विधानसभा चुनावों और कई राज्यों में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बैठक को विपक्षी एकता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी पहले ही खुद को इंडिया गठबंधन से अलग कर चुकी है, जबकि डीएमके के बैठक में शामिल नहीं होने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऐसे में सोमवार की बैठक विपक्षी राजनीति की आगामी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।



