School Admission : छत्तीसगढ़ में शिक्षा में भेदभाव पर कड़ा प्रहार…! RTE में दाखिला देने से इनकार पर भुगतने होंगे गंभीर परिणाम…निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द…सरकार का सख्त आदेश
रायपुर, 07 अप्रैल। School Admission : छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा के क्षेत्र में एक बार फिर मजबूत और संवेदनशील पहल करती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि गरीब और वंचित बच्चों के शिक्षा के अधिकार से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए सख्त कदम उठाते हुए सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे प्रदेश में समान और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार ((School Admission)) के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी विद्यालयों पर सख्त रुख अपनाया है। स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान
राज्य में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके तहत गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में आरटीई के तहत लगभग 3 लाख 63 हजार से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष भी कक्षा पहली की करीब 22 हजार सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
सरकार द्वारा इन बच्चों के लिए निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि भी दी जाती है। यह राशि प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या स्कूल की वास्तविक फीस (जो कम हो) के आधार पर तय की जाती है।
अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति
छत्तीसगढ़ में कक्षा 1 से 5 तक 7,000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये वार्षिक प्रतिपूर्ति निर्धारित है, जो कई राज्यों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत प्रवेश देना सभी निजी विद्यालयों की वैधानिक जिम्मेदारी है। यदि कोई विद्यालय प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता समाप्त करना भी शामिल है।
3,50,000 से अधिक बच्चे हो रहे हैं लाभान्वित
वर्तमान में, राज्य भर के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से लगभग 363,515 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस वर्ष भी, कक्षा 1 में लगभग 22,000 सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। चूंकि सभी निजी स्कूलों को RTE अधिनियम के प्रावधानों के तहत मान्यता प्रदान की गई है, इसलिए निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करना उनका वैधानिक दायित्व है।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
यदि कोई निजी स्कूल RTE के तहत दाखिला (School Admission) देने से मना करता है या दाखिला प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो राज्य सरकार उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी। इसमें स्कूल की मान्यता रद्द करने तक के प्रावधान शामिल हैं। शिक्षा विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही भरोसा करें।
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