गरियाबंद, 04 अप्रैल। School Scam : गरियाबंद जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र आमामोरा से शिक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं की तस्वीर सामने आई है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री स्कूल जतन अभियान के तहत करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला (School Scam) कुकरार और हथौड़ाडीह के लिए भवन निर्माण की स्वीकृति हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने फाइलों में प्रगति दिखाकर राशि का बंदरबांट किया है।
पहले मामले में शासकीय प्राथमिक शाला कुकरार के लिए 16 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। लेकिन मौके पर केवल नींव खोदकर छोड़ दी गई है, जबकि दस्तावेजों में इसे छज्जा लेवल तक पूर्ण बताया गया है।
वहीं, शासकीय प्राथमिक शाला हथौड़ाडीह के लिए 20 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी। फाइलों में इसे लेंटर लेवल तक तैयार बताया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर निर्माण अधूरा पड़ा है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला तत्कालीन सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग नवीन भगत के कार्यकाल से जुड़ा है।
वर्तमान सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल ने कहा है कि राशि स्वीकृत हुई है, लेकिन निर्माण कार्य क्यों रुका है, यह जांच का विषय है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच जारी है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र से धीरे-धीरे सामान्य स्थिति (School Scam) में लौट रहे इन इलाकों में क्या बच्चों को जल्द पक्का स्कूल भवन मिल पाएगा या फिर यह योजनाएं केवल फाइलों तक ही सीमित रह जाएंगी।



