पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़ : साय सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रदेश में कल 15 नवंबर को कुल 195 उपार्जन केन्द्रों में 19,464 क्विंटल धान का उपार्जन किसानों से किया गया। यह तय लक्ष्य 160 लाख मिट्रिक टन या 16 करोड़ क्विंटल का 0.012165 प्रतिशत है। शासन द्वारा राज्य के 2,739 उपार्जन केन्द्रों में 2058 सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खरीदी का कार्य शुरू किया गया है।

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प्रदेश भर में सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल पर जाने से उपार्जन प्रभावित हुआ है। चार सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के सभी 2058 सेवा सहकारी समितियों के प्रबंधक सहित लगभग 12 हज़ार कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। इनकी प्रमुख मांगों में धान खरीदी में सूखत का भुगतान शासन करें, सेवा सहकारी नियम 2008 में संशोधन, कंप्यूटर आपरेटरों को 6 के बजाए 12 महीने का भुगतान व आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने की मांग शामिल है। वहीं इस हड़ताल के मध्य नजर शासन के निर्देश पर विपणन संघ द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से 2,739 डेटा एंट्री ऑपरेटरों की व्यवस्था धान उपार्जन के लिए की गई है। कई जिलों में सरकार द्वारा सहकारिता विभाग के कर्मचारियों को भी धान उपार्जन की जिम्मेदारी दी है।

शासन द्वारा धान खरीदी में संलग्न कर्मचारियों को अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (ESMA) के तहत अधिसूचित कर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे उपार्जन प्रक्रिया निर्बाध रूप से संचालित रहे। उपार्जन केन्द्रों में ऑनलाइन टोकन एवं तुंहर टोकन प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया गया है। कल प्रदेश में जारी हुए कुल 2,029 टोकन में से 1,912 किसानों द्वारा तुंहर टोकन के माध्यम से आवेदन किया गया। इसके अतिरिक्त, किसान समिति स्तर पर भी टोकन हेतु आवेदन कर सकते हैं। लघु एवं सीमांत किसानों को अधिकतम 02 टोकन, तथा दीर्घ किसानों को अधिकतम 03 टोकन की सुविधा प्रदान की गई है। इसके साथ ही प्रदेश स्तर पर हेल्पलाइन 1800 233 3663 के माध्यम से भी शिकायतें एवं जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

पिछली बार साय सरकार ने 149.25 लाख मीट्रिक टन धान उपार्जित किया था। राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत खरीफ सीजन 2024-25 में रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इसमें मोटा धान 81.98 लाख मीट्रिक टन, पतला धान 10.75 लाख मीट्रिक टन और सरना धान 56.52 लाख मीट्रिक टन शामिल था। धान की यह खरीदी राज्य बनने के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। धान खरीदी का सिलसिला 14 नवंबर 2024 से शुरू होकर 31 जनवरी 2025 तक जारी रहा था जिसके अंतर्गत राज्य के पंजीकृत 25 लाख 49 हजार 592 किसानों ने धान विक्रय किया। धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 31 हजार 89 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था। महासमुंद जिला सर्वाधिक 11.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर राज्य में पहले नंबर पर था। वहीं बेमेतरा जिला 9.38 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर दूसरा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिला 8.56 लाख मीट्रिक टन धान खरीदकर तीसरे स्थान पर था। साय सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में 24 लाख 72 हजार 310 किसानों से समर्थन मूल्य पर 147 मिट्रिक टन धान खरीदी की थी। धान खरीदी अभियान 1 नवंबर 2023 से 4 फरवरी 2024 तक चला था।

इस वर्ष धान खरीदी पूर्णतः आधार-आधारित है, जिसके अंतर्गत किसानों को बायोमेट्रिक पहचान के माध्यम से धान विक्रय करने की सुविधा दी गई है। प्रक्रिया को अधिक दक्ष एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से खाद्य विभाग द्वारा राज्य स्तरीय उड़नदस्ते गठित किए गए हैं, जो सतत् औचक निरीक्षण करते हुए उपार्जन में संभावित अनियमितताओं पर नियंत्रण रखेंगे तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

सभी उपार्जन केन्द्रों में स्थानीय स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया गया है तथा पीने के पानी, प्रसाधन, प्राथमिक उपचार पेटी आदि की व्यवस्थाएँ सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। धान की तौल इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों से की जा रही है, ताकि किसानों को उनके हर एक दाने का उचित मूल्य मिल सके।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी कलेक्टरों एवं धान उपार्जन से संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उपार्जन कार्य को व्यवस्थित, समयबद्ध और पारदर्शी रूप से संचालित किया जाए।



