पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर. साल 2006 में राजधानी रायपुर के एक बैंक घोटाले में आमजन और 22 हजार खाताधारकों के 54 करोड़ रुपए डूब गए थे। इस बैंक के डूबने का सबसे बड़ा कारण था फर्जी एफ.डी.आर. और इन फर्जी एफ.डी.आर. से जारी किये गये ऋण। इस बैंक का नाम था इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला नागरिक सहकारी बैंक। 2006 के इस घोटाले की जाँच में तेजी तब आ गई थी जब जून 2023 में में माननीय न्यायालय के आदेश के बाद पुनः नये सिरे से जांच के आदेश दे दिए गये थे। इस मामले में खुद तात्कालिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर वीडियो अपलोड किए थे।

भारत माला घोटाले के आरोपी विजय जैन का 2006 में तात्कालिक रूप से रायपुर के एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर के साथ व्यवसायिक संबंध था। इन दोनों ने मिलकर करोड़ों रुपए के प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सड़कों के निर्माण का ठेका उठाया था। तात्कालिक केंद्र और राज्य सरकारें गांवों के विकास के लिए प्रतिबद्ध थी। गांवों के विकास के लिए पहूंच मार्ग अति आवश्यक और महत्वपूर्ण पहलू था इसलिए छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े राज्य के लिए विशेष सहायता और योजनाएं बनाई एवं लागू की गई थी।
तात्कालिक वर्षों में हजारों करोड़ के सड़क निर्माण कार्यों की निविदा जारी की गई थी। प्रत्येक सरकारी कार्य में निविदा आमंत्रण में एक महत्वपूर्ण विषय रहता है सुरक्षा निधि का। इसमें बैंक गारंटी या एफ.डी.आर. जमा करना अनिवार्य होता है। इसी शर्त को पूरा करने के लिए इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक से विजय जैन और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर ने करोड़ों रूपए के एफ.डी.आर बनवाये थे। इस पूरे मामले में फर्जी जमा पर्ची के माध्यम से बैंक में नकदी जमा दिखाई गई थी पंरतु नकद राशि बैंकों में जमा ही नहीं की गई थी और इन नकद जमा राशि के आधार पर एफ.डी.आर. बना कर टेंडर प्रक्रिया में जमा किया गया।
इस मामले में की शुरुआत साल 1995 में होती है। कम ब्याज में कर्ज देने के उद्देश्य से रायपुर के एक महिला समूह ने संचालक मंडल के रूप में इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक की स्थापना रायपुर के सदर बाजार में की थी। 11 साल तक सब कुछ ठीक से चलता रहा। लेकिन साल 2006 में बैंक में ताला लग गया। बैंक में ताला लगा देखकर खाताधारक परेशान हो गए। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शुरुआत में पुलिस ने 19 बैंककर्मी एवं संचालक मंडल की महिलाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की। बाद में बैंक के मैनेजर उमेश सिन्हा को मुख्य आरोपी मानकर गिरफ्तार किया गया।
इंदिरा प्रियदर्शनी महिला सहकारिता द्वारा संचालित बैंक के मामले में उमेश सिन्हा का न्यायालय के आदेश पर नार्को टेस्ट बेंगलुरु में 6,7, 8 जून 2007 को हुआ। इस नार्को टेस्ट की रिपोर्ट पुलिस ने न्यायालय में जमा नहीं की। क्योंकि इस टेस्ट में कई बड़े राजनेताओं और रसूखदारों के नाम थे। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई। कुछ संदिग्ध जमानत पर रिहा होते गए, तो कुछ फरार हो गए। नार्को टेस्ट की सीडी सार्वजनिक भी हुई थी।
इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले की जांच करने के बाद 2007 में चालान और इसके बाद दो पूरक चालान भी पेश किया जा चुका है। पूरे मामले में वर्ष 2023 में तात्कालिक उप महाधिवक्ता एवं विशेष लोक अभियोजक संदीप दुबे ने मिडिया को बताया था कि 18 साल पुराने इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाला मामले की नए सिरे से जांच के लिए कोर्ट में आवेदन पेश किया था। इसके आधार पर कोर्ट ने 20 जून 2023 को पूरे प्रकरण की नए सिरे से जांच करने के आदेश दिए थे।
कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली पुलिस पिछले तीन महीनों से प्रकरण की जांच कर रही है। लेकिन अब तक पूरक चालान और जांच की वर्तमान स्टेटस को नहीं बताया गया है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस अपना पक्ष रखेगी।कोतवाली पुलिस ने अगस्त 2023 में 44 संदिग्धों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था, इसमें कई करोबारी, राजनेता और उद्योगपति भी शामिल थे।10 अभियुक्तों के अलावा पालिग्राफिक टेस्ट, ब्रैन मैपिंग और नार्को टेस्ट के आधार पर जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, पुलिस अब उनसे पूछताछ करेगी।

मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है और शायद पुलिस इसकी जांच कर रही है पर यक्ष प्रश्न तो यही है कि भारत माला घोटाले में आरोपी विजय जैन का घोटालों-घपलों और फर्जीवाड़ों से क्या नाता है, क्या करता है सोची-समझी और सुनियोजित साजिश ?



