पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर. श्री ठाकुर रामचन्द्र स्वामी जैतूसाव मठ में किये गये फर्जीवाड़ों को आपने पूर्ववर्ती अंक में पढ़ा,अब पढ़ें भ्रष्ट राजनेताओं, भूमाफियाओं, उनके दलाल और पूरी तरह से सड़ चुकी लचर व्यवस्था और तंत्र की इनसाइड स्टोरी।

श्री ठाकुर रामचन्द्र स्वामी जैतूसाव मठ के न्यास समिति या जिसे हम आम भाषा मे जैतूसाव ट्रस्ट कहते हैं और जिसका पंजीयन 1955 में हुआ था। इस ट्रस्ट को पंजीयक सार्वजनिक न्यास ने लोक न्यास अधिनियम 1951की धारा 26 के अंतर्गत 2007 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश को रिसीव्हर नियुक्त करने के लिए प्रस्तुत किया था। साथ ही वर्ष 2016 में अध्यक्ष, राजस्व मंडल ने अपने आदेश में कहा कि जनहित में मठ की चल-अचल संपत्ति की व्यवस्था और उसके दुरुपयोग को रोकने भंग न्यास समिति की जगह प्रबंधक के रूप में कलेक्टर को दर्ज़ किया जाना चाहिए।

वो ट्रस्ट बदस्तूर आज भी अपने कुकर्मों को अंजाम दे रहा है। जिस भूमि को तात्कालिक सर्वाहारा और मंहत ने 1972 में बेच दिया उसे फिर बेचने के लिए 1983 में ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा प्रस्ताव लाया जाता है और 1984 में रजिस्ट्रार आफ पब्लिक ट्रस्ट से अनुमति लेने के लिए पत्र लिखते है साथ ही लालाराम वर्मा और अन्य किसानों से अनुबंध कर राशि 2.94 लाख प्राप्त कर लेता है। उसी भूमि पर फिर 2020 में राष्ट्रीय राजमार्ग के भू-अर्जन पर मुआवजे की मांग भी करता है।

अब शुरू होता है खेल और आप इससे जुड़े लोगों की ताकत का अंदाजा भी नहीं लगा सकते। भारत माला प्रोजेक्ट रायपुर विशाखापत्तनम प्रस्तावित इकनॉमिक कारिडोर के भूमि अधिग्रहण और मुआवजा बंटवारे में भारी गड़बड़ियां सामने आती है। भारी शिकायतों और दबाव में इसकी जांच शुरू होती है। तात्कालिक रायपुर के अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पंचभाई और संयुक्त कलेक्टर निधि साहू जांचकर्ताओं के रूप में पूरे मामले को सामने लाते हैं और अपने 11/9/2023 के जांच प्रतिवेदन में करोड़ों रूपए के फर्जीवाड़ों को उजागर करते हैं। इसके साथ ही तात्कालिक अपर कलेक्टर बी.सी.साहू ने अपने 30/1/23 के जांच प्रतिवेदन में जल संसाधन विभाग की शासकीय भूमि पर दिये गये अवैध मुआवजे और 19/7/23 के जांच प्रतिवेदन में अवैध भूस्वामियों को दिये गये मुआवजे को उजागर कर देते हैं।

अब इस खेल को समझिए रायपुर विशाखापत्तनम कारिडोर में अभनपुर के सिर्फ छ: गांवों की भूमि अधिकृत की गई है। जो है झांकी, मुडंवापार/भेलवाडीह,उरला,नायकबांधा,टोकरो और सातपारा है। विश्वनाथ पांडेय और उनके वारिसान उमा तिवारी ने जिस जमीन को 1972 में खरीदा और जिस पर स्वामित्व का विवाद है वो भूमि ग्राम उगेतरा में स्थित है। साथ ही इस पर राजस्व के 4 न्यायालय ने उमा तिवारी को भूस्वामी माना है और वर्तमान में यह मामला सिविल न्यायालय में लंबित है। ग्राम उगेतरा स्थित है भारत माला परियोजना के पारागांव से टेडेसरा बायपास पर।

रायपुर और दुर्ग के बीच एक सिक्सलेन बायपास का निर्माण किया जा रहा है, जो भारतमाला परियोजना का ही एक हिस्सा है। यह 92.23 किलोमीटर लंबा है और राजनांदगांव के टेडेसरा से शुरू होकर रायपुर जिले के आरंग के पारागांव तक जाएगा। यह बायपास दुर्ग-रायपुर-आरंग एक्सप्रेसवे के रूप में जाना जाता है। इस परियोजना की अनुमानित लागत है लगभग 2281 करोड़ रुपये और इसकी समय सीमा दिसंबर 2025 तक पूरा होने की है।

रायपुर और दुर्ग के बीच एक सिक्सलेन बायपास का निर्माण किया जा रहा है, जो भारतमाला परियोजना का ही एक हिस्सा है। यह 92.23 किलोमीटर लंबा है और राजनांदगांव के टेडेसरा से शुरू होकर रायपुर जिले के आरंग के पारागांव तक जाएगा। यह बायपास दुर्ग-रायपुर-आरंग एक्सप्रेसवे के रूप में जाना जाता है। इस परियोजना की अनुमानित लागत है लगभग 2281 करोड़ रुपये और इसकी समय सीमा दिसंबर 2025 तक पूरा होने की है।

वर्तमान में पूरा मुआवजा विवाद रायपुर विशाखापत्तनम कारिडोर में किये गये फर्जीवाड़ा का है। जिसमें राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसी जांच कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विधानसभा में की गई घोषणा जिसमें उन्होंने इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने की घोषणा की थी।
आनन-फानन में 23/4/25 को अपराध पंजीबद्ध करती है और 25/4/25 को कई ठीकानों में छापेमारी करती है। एसीबी और ईओडब्ल्यू उगेतरा में दिये गये मुआवजे में भूस्वामी उमा तिवारी उनके पति केदार तिवारी और कारोबारी हरमीत खनूजा, विजय जैन के घरों में छापेमारी और गिरफ्तारी करतीं हैं। सबसे यक्ष प्रश्न है कि ग्राम उगेतरा रायपुर विशाखापत्तनम कारिडोर में नहीं बल्कि दुर्ग-रायपुर-आंरग एक्सप्रेस-वे में स्थित है।
भारत माला प्रोजेक्ट घोटालों पर इनसाइड स्टोरी और एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट – 3(संपूर्ण दस्तावेज़ी साक्ष्यों, साक्षात्कार और ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित)



