पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह और भारत सरकार की नीतियों के विरुद्ध सहकारिता और सहकारी बैंकों के स्ट्रक्चर को गुपचुप तरीके से बदलने की तैयारियां पूरी हो गई है। सबसे पहले इस प्रकार का प्रस्ताव 2017-18 में तात्कालिक डा. रमन सिंह सरकार में लाया गया था और रिजर्व बैंक से इसमें सैद्धांतिक सहमति भी ले ली गई थी। पंरतु 2018 में सत्ता परिवर्तन के बाद तात्कालिक भूपेश सरकार ने इस पूरे प्रपोजल को ही सिरे से खारिज कर दिया था और कहा था कि इससे पूरे सहकारिता और उसके मूल तत्व ही नष्ट हो जायेंगे।

जबकि एक बार फिर केन्द्रीय मंत्री शाह और भारत सरकार की त्रिस्तरीय संरचना को मजबूत करने की नितियों और प्रयासों के विरुद्ध राज्य सरकार और अपेक्स के कुछ बड़े अधिकारियों ने इसमें भारी फेरबदल की तैयारी गुपचुप तरीके से पूरी कर ली है। वर्तमान व्यवस्था और केन्द्रीय नीति के विरुद्ध त्रिस्तरीय संरचना को द्विस्तरीय संरचना में बदला जा रहा है। और इसमें जिला सहकारी बैंकों का पूर्णतः विलय अपेक्स बैंक में किये जाने का प्रावधान किया गया है। जिससे पूरी व्यवस्था केन्द्रीय कृत हो जायेगी और भ्रष्ट तंत्र इस पर पूरी तरह प्रभाव जमा लेगा।

इस पूरे मामले में तात्कालिक अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, सहकारिता के समक्ष अगस्त माह में सहकारिता विभाग और अपेक्स बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्ताव रख कर विस्तृत चर्चा की थी। इसी विषय पर तात्कालिक अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष भी इस महत्वपूर्ण विषय को रख कर इस पर चर्चा की थी। विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले का एक पावर पाइंट प्रेजेंटेशन भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष सितंबर के पहले हफ्ते में भी किया गया था।

इस बीच छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 30 सितंबर को किया गया था। नए मुख्य सचिव विकासशील के आते ही 14 आई.एस.एस अधिकारियों के तबादले किए गए थे। जिसके बाद अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू को महानिदेशक, छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी का प्रभार सौंपा दिया गया था। रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल ने जब इस विषय में वरिष्ठ आईएएस सुब्रत साहू से मामले पर बातचीत की तो उन्होंने इस पूरे मामले की पुष्टि की है।

वहीं इस मामले में रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN 24 ने नवनियुक्त प्राधिकृत अधिकारी और चेयरमैन केदारनाथ गुप्ता एवं वर्तमान सचिव, सहकारिता सी.आर. प्रसन्ना से बातचीत की तो पूरे मामले की जानकारी ना होना बताया गया। साथ ही केदारनाथ गुप्ता ने कहा कि मामला राज्य सरकार का है इसलिए उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। यक्ष प्रश्न यह है कि क्या नवनियुक्त अपेक्स चेयरमैन केदारनाथ गुप्ता एवं वर्तमान सचिव सहकारिता सी.आर. प्रसन्ना को भी अंधेरे में रखा गया है ?
केन्द्रीय मंत्री शाह और भारत सरकार का मकसद सहकारिता और सहकारी बैंकों को अन्य आर्थिक संस्थानों की तरह सुगम, किफायती वित्त और समान व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने का है और इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए व्यापक रूप से रणनीतियाँ बनाई गई है। जैसे किफायती ऋण संवितरित करने और लोकतांत्रिक स्वरूप को बरकरार रखने के लिए त्रि-स्तरीय संरचना प्राथमिक कृषि क्रेडिट समिति, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और राज्य सहकारी बैंक को संरक्षित और प्रोत्साहित करना। सहकारी समितियों के माध्यम से वित्तीय समावेशिता की प्राप्ति को बढ़ावा देने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ संयुक्त रूप से कार्य करते हुए व्यवहार्यता के आधार पर कवर न हुए प्रत्येक पंचायत में एक प्राथमिक कृषि क्रेडिट समिति, प्रत्येक जिले में एक जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और प्रत्येक शहरी क्षेत्र में एक शहरी सहकारी बैंक की स्थापना को प्रोत्साहित करना शामिल है।
क्योंकि इस डबल इंजन सरकार को राज्य में सत्तारूढ़ इन्हीं किसानों ने किया था और इन भोलेभाले किसानों के विरुद्ध षड्यंत्र किसने रचा ? साथ ही इससे उलट केन्द्रीय नेतृत्व और सरकार में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले अमित शाह जैसे तेजतर्रार मंत्री के प्रयासों और मकसद को पलीता लगाने का काम कौन करना चाह रहा है ? या फिर राजनैतिक नेतृत्वकर्ताओं को हाशिए में ढकेलने की एक सोची-समझी रणनीति बनाई गई है ?



