पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़। राज्य में साय सरकार की महंती योजानाओं में से एक 3100/- प्रति क्विंटल की दर से 160 लाख मीट्रिक टन धान उपार्जन 25 लाख किसानों से किया जायेगा की शुरुआत 15 नवंबर से जारी है। राज्य सरकार द्वारा जारी पहले 4 दिनों के आंकड़ों में ही भारी अंतर दिखाई दे रहा है। जारी आंकड़ों में जहां 17 नवंबर तक के अनुसार कुल धान खरीदी 2,43,831 क्विंटल, 18 नवंबर को खरीदी 4,56,859 क्विंटल एवं 18 नवंबर तक कुल खरीदी 7,28,004 क्विंटल की बताई गई।
इनका विश्लेषण और गुणा-भाग किया जाये तो खरीदी में 27,314 क्विंटल का फर्क है और यह सरकार के 3100/- प्रति क्विंटल की दर से 8,46,73,400/- का होता है। और ये सभी आंकड़े 18 नवंबर को दोपहर और देर शाम ही जारी किए गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि सरकार को चलाने वाले आला अधिकारी और ब्यूरोक्रेट्स अपनी नाकामी और कमियों को छुपाने के लिए घिसा-पिटा बहाना बनाकर बच सकते हैं कि प्रत्येक जिलों में प्राप्त आंकड़े में अपडेट जारी रहता है पंरतु इतना बड़ा सरकारी तंत्र फेल कैसे हो सकता है ?
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18 नवंबर को दोपहर जारी आंकड़ों के अनुसार 17 नवंबर तक राज्य में किसानों से 2,43,831 क्विंटल धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर की गई, जिसमें 1,05,342 क्विंटल मोटा, 71,603 क्विंटल पतला तथा 66,886 क्विंटल सरना धान शामिल हैं। 18 नवंबर को 4 लाख 56 हजार 859 क्विंटल धान खरीदी किसानों से की गई। बीते 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी के तहत अब तक राज्य में कुल 7 लाख 28 हजार 4 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है, जिसमें 3 लाख 4 हजार 512 क्विंटल मोटा धान, 2 लाख 1 हजार 174 क्विंटल पतला तथा 2 लाख 22 हजार 317 क्विंटल सरना धान शामिल है।
राज्य सरकार ने दावा किया है कि राज्य के सभी 33 जिलों में धान खरीदी की शुरूआत हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों के आधार पर 17 नवंबर को 725 उपार्जन केन्द्रों में किसानों ने अपना धान बेचा। 18 नवंबर की स्थिति में 1155 उपार्जन केन्द्रों में किसानों ने अपना धान बेचा है। बेमेतरा जिले में सर्वाधिक 97698.8 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है, जबकि राजनांदगांव जिले ने 92390.4 क्विंटल और रायपुर जिले ने 83299.2 क्विंटल धान का उपार्जन कर राज्य में धान खरीदी के मामले में क्रमशः दूसरे एवं तीसरे स्थान पर है। खाद्य विभाग से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 18 नवंबर तक बस्तर जिलें में 395.6 क्विंटल बीजापुर में 155.2 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 6.4 क्विंटल, कांकेर में 754.8, कोण्डागांव में 5351.2, नारायणपुर में 7.2, सुकमा में 24.4, बिलासपुर में 4050.4, गौरेला-पेड्रा-मरवाही में 6668.4, जांजगीर चांपा में 67.6, कोरबा में 396.8, मुंगेली में 8806.8, रायगढ़ में 3949.6, सक्ती में 48, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 3922.8, बालोद में 70197.2, बेमेतरा में 97698.8, दुर्ग में 73033.6, कवर्धा में 22252.4, राजनांदगांव में 92390.4, खैरागढ़-छूईखदान-गंडई में 50926, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी में 3214, बलौदाबाजार में 60551.2, धमतरी में 75660.8, गरियाबंद में 28674.4, महासमुंद में 23388.8, रायपुर में 83299.2, बलरामपुर में 1490.4, जशपुर में 248, कोरिया में 4200, सरगुजा में 645.2, सूजरपुर में 3415.2, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1513.6 क्विंटल धान का उपार्जन समर्थन मूल्य पर किया गया।
सरकारी दावों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप राज्य के सभी 2739 धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों की सुविधा हेतु पारदर्शी टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, नमी मापक यंत्र, बारदाना एवं अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की गई है, ताकि किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। धान उपार्जन के समानांतर किसानों को भुगतान की व्यवस्था भी छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है। इस साल धान खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य विपणन संघ को 26,200 करोड़ रूपए की बैंक गांरटी दी है, ताकि किसानों को समर्थन मूल्य के भुगतान में किसी भी तरह की दिक्कत न होने पाएं।



