रायपुर : राजधानी रायपुर में पुलिस ने इस साल जनवरी से लेकर नवंबर तक 152 नए आरोपियों को गुंडा और निगरानी सूची में शामिल किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें ज्यादातर की उम्र सिर्फ 19 से 25 साल के बीच है। यानी राजधानी का बड़ा क्राइम लोड अब युवा हाथों से उठाया जा रहा है।
पिछले तीन साल से ये ही युवा लगातार मारपीट, चाकूबाजी, हत्या और चोरी जैसे अपराधों में शामिल होते रहे हैं। पुलिस की कड़ाई और कार्रवाई के बाद भी इन पर कोई असर नहीं पड़ा है।
सूची के आंकड़े बताते हैं—
- 126 आरोपी मारपीट, हत्या और चाकूबाजी जैसे हिंसक अपराधों के
- 26 आरोपी चोरी और लूट जैसे आर्थिक अपराधों के
इसके साथ ही रायपुर में अब 630 गुंडा-बदमाश और 325 हिस्ट्रीशीटर चिह्नित हो चुके हैं। पिछले साल हत्या के मामले 7% बढ़े, वहीं चोरी की घटनाओं में भी उछाल देखा गया है।
एक ही महीने में 61 बदमाश लिस्ट में शामिल
पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि अगस्त में अकेले 55 गुंडा-बदमाश और 6 निगरानी बदमाश सूची में जोड़े गए। अक्टूबर में 20 और नवंबर में अब तक 18 नए नाम शामिल हो चुके हैं।
16 बदमाश हुए बाहर
शहर के 16 बदमाशों को गुंडा और निगरानी सूची से हटाया भी गया है। इनमें 12 गुंडा-बदमाश और 4 निगरानी सूची के आरोपी शामिल हैं। ये पिछले तीन साल से किसी अपराध में शामिल नहीं थे, कुछ शहर छोड़ चुके हैं और कुछ उम्रदराज हो चुके हैं।
नई सूची में 126 खतरनाक बदमाश
इन नए नामों में शामिल 126 आरोपियों पर मारपीट और चाकूबाजी के 3–4 मामले दर्ज हैं। वहीं लूट और चोरी करने वाले 26 बदमाशों को हिस्ट्रीशीटर की श्रेणी में जोड़ा गया है।
स्पेशल डीजी (सेवानिवृत्त) अन्वेष मंगलम का विश्लेषण
उनके अनुसार गुंडा और निगरानी सूची में नाम जोड़ना एक सिस्टमेटिक प्रक्रिया है।
- शारीरिक नुकसान पहुंचाने वाले आरोपी गुंडा-बदमाश सूची में
- आर्थिक नुकसान वाले आरोपी निगरानी सूची में रखे जाते हैं।
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह की पुष्टि
उन्होंने कहा कि लगातार अपराध करने वाले बदमाशों को चिन्हित कर नई सूची तैयार की गई है। तीन साल से शांत रह रहे लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। मॉनिटरिंग मजबूत करने के लिए यह अपडेट अनिवार्य था।



