रायपुर। राजधानी जिले में रेत खदानों को लेकर बड़ा खेल चल रहा है। साल 2023 में रायपुर जिले की 13 रेत खदानों का टेंडर हुआ था, लेकिन इनमें से केवल 8 खदानों को ही पर्यावरण विभाग से एनओसी मिली थी। बाकी 5 खदानों को आज तक अनुमति नहीं मिली, बावजूद इसके वहां रेत का अवैध उत्खनन बेरोकटोक जारी है।
सितंबर में खत्म हुई लीज, फिर भी चल रहा उत्खनन
जानकारी के मुताबिक इन सभी खदानों की लीज सितंबर 2025 में समाप्त हो चुकी है, लेकिन उत्खनन रुकने के बजाय और तेज़ी से जारी है। जब इस पर डीबी स्टार ने सवाल किया, तो खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना था कि “कुछ खदानों को एक्सटेंशन दिया गया है।” मगर जब पूछा गया कि कौन-सी खदानों को, तो अफसर जवाब नहीं दे सके।
जिन खदानों पर उठे सवाल
रायपुर जिले में कुरुद, लखना, कागदेही, कुम्हारी, पारागांव और हरदीडीह खदानों की बोली 2 साल के ठेके पर हुई थी। वहीं कुरुद, मोहमेला A, मोहमेला B, चिखली A, चिखली B, चिखली C और राटाकाट खदानों के लिए भी 2023 में टेंडर खोला गया था। लेकिन अब यह स्पष्ट नहीं कि इनमें से किन खदानों को एक्सटेंशन मिला और किन्हें नहीं।
बिना एनओसी के दो साल से रेत की लूट
पर्यावरण विभाग से अनुमति न होने के बावजूद, पांच खदानों में दो साल से लगातार उत्खनन हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस खेल में स्थानीय प्रशासन और कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है।
विभाग ने साधी चुप्पी
खनिज विभाग से जब पूछा गया कि बिना एनओसी खदानों को उत्खनन की अनुमति कैसे, तो अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। विभाग यह भी नहीं बता रहा कि किन खदानों को अस्थायी एक्सटेंशन दिया गया और उसकी शर्तें क्या हैं।



