रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ पुलिस की साख पर सवाल उठाने वाला चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रायपुर क्राइम ब्रांच के 6 पुलिसकर्मियों पर दुर्ग के एक कारोबारी की कार से 2 लाख रुपये चोरी करने का आरोप लगा है। कारोबारी ने इसकी लिखित शिकायत दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल को सौंपी है, साथ ही CCTV फुटेज भी जमा किया है, जिसमें वर्दीधारी टीम के कुछ सदस्य कार से रकम निकालते स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
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घटना 18 अक्टूबर की रात की बताई जा रही है। शिकायत के बाद मामला गंभीर होता देख रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने कार्रवाई करते हुए आरक्षक प्रशांत शुक्ला को निलंबित कर दिया है, जबकि बाकी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच जारी है।
कारोबारी ने कहा – चेकिंग के बहाने लूट, CCTV में सब कैद
जानकारी के मुताबिक, मयंक गोस्वामी, जो धमतरी में बाइक शो-रूम के मालिक हैं, धनतेरस की रात अपने घर दुर्ग लौट रहे थे। तभी रायपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने उनका पीछा करते हुए विद्युत नगर (पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र) तक आकर रोक लिया। टीम ने “संदिग्ध वाहन” बताकर कार की तलाशी शुरू की, लेकिन कोई नोटिस या औपचारिक कार्रवाई नहीं की गई। कारोबारी के मुताबिक, तलाशी के दौरान टीम के कुछ पुलिसकर्मियों ने कार में रखे 2 लाख रुपये निकाल लिए। जब घर पहुंचने के बाद उन्होंने रकम गायब देखी, तो CCTV फुटेज खंगाला — जिसमें साफ दिखा कि एक पुलिसकर्मी कार से कुछ निकालकर अपनी जेब में रख रहा है।
गोपनीय कार्रवाई बनी ‘वर्दी की लूट’
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, साइबर रेंज के एएसपी संदीप मित्तल ने एक “गोपनीय ऑपरेशन” के तहत प्रशांत शुक्ला, धनंजय गोस्वामी, प्रमोद वट्टी, अमित, दिलीप जांगड़े और वीरेंद्र भार्गव को दुर्ग भेजा था। टीम को एक संदिग्ध वाहन की तलाश में रवाना किया गया था।
बताया गया कि खोज के दौरान संदिग्ध वाहन तो हाथ नहीं लगा, लेकिन कारोबारी की गाड़ी पर कार्रवाई के नाम पर यह वारदात हो गई। टीम के अन्य सदस्यों का कहना है कि पैसे निकालने का काम अकेले प्रशांत शुक्ला ने किया, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।
जांच रायपुर SSP को सौंपी गई
मामला बढ़ने पर दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा कारोबारी से शिकायत और फुटेज प्राप्त हुआ है। हमने रिपोर्ट बनाकर रायपुर एसएसपी को भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई रायपुर से होगी। वहीं, रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने आरक्षक प्रशांत शुक्ला को तत्काल सस्पेंड कर दिया है और सभी संबंधित जवानों से पूछताछ जारी है।
CCTV ने खोली ‘गोपनीय जांच’ की पोल
यह पूरा मामला इस बात की मिसाल बन गया है कि गोपनीय जांच के नाम पर चलने वाली कार्रवाई किस तरह गलत दिशा में मुड़ सकती है। फुटेज सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस की “इंटेलिजेंस कार्रवाई” अब आम लोगों की लूट का जरिया बन रही है?



