बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CG-PSC) भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। मंगलवार (14 अक्टूबर 2025) को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सरकार से कड़े सवाल पूछे और जांच की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया, जिसमें अन्य उम्मीदवारों और PSC अधिकारियों की भूमिका का ब्योरा मांगा गया है।
जांच में देरी, उम्मीदवार परेशान
हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि CG-PSC 2021 में हुई गड़बड़ी की जांच अब तक अधूरी क्यों है? कोर्ट ने पूछा, “जब 37 चयनित उम्मीदवारों को अभी तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला, तो उन्हें अनिश्चितता के भंवर में क्यों छोड़ा गया है?” कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि PSC द्वारा चुने गए उम्मीदवार आज भी डेडलॉक की स्थिति में हैं।
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सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि 17 उम्मीदवारों की भूमिका की जांच चल रही है, लेकिन बाकी आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। कोर्ट ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “रिपोर्ट में 41 नाम थे, अब केवल 17 पर जांच? बाकी का क्या हुआ?” कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार यह बताए किन-किन उम्मीदवारों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई? कितनों की जांच अभी लंबित है?
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पेपर लीक का खुलासा, कोर्ट का सुझाव
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा के अंतिम समय में पेपर लीक हुआ था। इस पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा, “अगर पेपर लीक हुआ, तो परीक्षा पर पुनर्विचार करना चाहिए। लेकिन जांच पूरी होने तक उम्मीदवारों को क्यों लटकाया जा रहा है?” कोर्ट ने सभी संबंधित अपीलों को एक साथ सुनवाई के लिए प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
अब तक 12 गिरफ्तार, बड़े नाम जेल में
इस घोटाले में अब तक 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। CBI ने 18 नवंबर 2024 को CG-PSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल को हिरासत में लिया था। इसके बाद 10 जनवरी 2025 को पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें शामिल हैं नितेश सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष का भतीजा, डिप्टी कलेक्टर चयनित),ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, CG-PSC),शशांक गोयल (डिप्टी कलेक्टर चयनित),भूमिका कटियार (डिप्टी कलेक्टर चयनित),साहिल सोनवानी (DSP चयनित) ये सभी आरोपी वर्तमान में जेल में हैं। हाल ही में परीक्षा नियंत्रक की गिरफ्तारी के बाद भी जांच की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
कोर्ट का सरकार को अल्टीमेटम
हाईकोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी कि जांच में पारदर्शिता और तेजी लाई जाए। कोर्ट ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक चयनित उम्मीदवारों को अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता। इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट की मांग की है, जिसमें सभी आरोपियों और अधिकारियों की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख हो।



