पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर. तथाकथित स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी का एक और बड़ा कारनामा सामने आया है। राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती इलाके के ब्रह्मपुरी स्थित 11 वीं शताब्दी के प्राचीन मंदिर विरंचीनारायण और नरसिंहनाथ मंदिर के स्वामित्व वाली धरमपुरा की बेशकीमती जमीन को कौड़ीयों के दाम पर दिसंबर 2022 में बेच दिया गया है। इस भूमि के विक्रय के लिए ना ही बतौर प्रबंधक, कलेक्टर रायपुर और ना ही पंजीयक, सार्वजनिक न्यास से ही अनुमति ली गई थी। रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल को मिले दस्तावेजों से ये पूरी कूटरचना और फर्जीवाड़ा सामने आया है।

पिछले अंकों में हमने जैतूसाव मठ और ग्राम सेवा सहकारी समिति की करोड़ों रूपए की जमीनों के फर्जीवाड़ों और स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी के कारनामों को उजागर किया था। अजय तिवारी का अब एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूर्व शासकीय कर्मचारी अजय तिवारी जो पूर्ववती मघ्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे उन्होंने तात्कालिक राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त कर रायपुर के अधिकांश मठ, मंदिरों और सहकारी समितियों में अपने रसूख के दम में कब्जा कर लिया है। कूटरचनाओं के दम पर क़ब्ज़े के बाद इस मठ-मंदिरों और सहकारी समितियों में बेहिसाब ना सिर्फ आर्थिक अनियमितता की गई बल्कि इनके स्वामित्व की सैकड़ों एकड़ जमीनों को बेचा गया।

दरअसल ऐसा ही एक और सनसनीखेज मामला फिर सामने आया है। इस बार यह मामला 11 वीं शताब्दी के ब्रह्मपुरी स्थित नरसिंहनाथ और विरंची नारायण स्वामी मंदिर की धरमपुरा स्थित खसरा नंबर 293/7 रकबा 0.158 हेक्टेयर यानी 17,007 वर्ग फुट भूमि का है। मई 2022 को मंदिर ट्रस्ट की बैठक आयोजित की जाती है, जिससे पिछली बैठक की पुष्टि और धरमापुरा स्थित भूमि विक्रय प्रस्ताव पारित किया जाता है। बैठक में जैन नामक किसी व्यक्ति को बेचने का प्रस्ताव पारित किया गया था परंतु उस मिनट्स बुक में सफेदा लगाकर नाम में कांट-छांट की गई और वह जमीन धनश्याम दानी को 21 लाख रुपए में दिसंबर 2022 को बेच दी जाती है। इस मामले में धनश्याम दानी से जब हमारी टीम ने संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि ” मुझे कुछ ज्यादा याद नहीं है, दस्तावेजों को देख कर मैं इस पर कुछ बोल सकूंगा।

इस पूरे मामले में तात्कालिक राजस्व अधिकारी अंजलि शर्मा और तात्कालिक हल्का पटवारी की भूमिका संदिग्ध और संदेहास्पद है। बतौर नायाब तहसीलदार अंजलि शर्मा द्वारा जुलाई 2021 में अपने नामांतरण आदेश में स्पष्ट लिखा है कि मृतक सर्वराकार महंत लक्ष्मीनारायण दास का नाम विलोपित कर श्री विरंची नारायण स्वामी सर्वराकार मंहत देवदास द्वारा प्रबंधक कलेक्टर रायपुर के नाम पर नामांतरण किये जाने का आदेश दिया जाता है। जबकि तात्कालिक अतिरिक्त तहसीलदार के तौर पर अंजलि शर्मा द्वारा अगस्त 2022 में ऋण पुस्तिका प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत आवेदन में खातेदार विरंची नारायण स्वामी सर्वराकार मंहत देवदास का नाम दर्ज कर नवीन ऋण पुस्तिका जारी करने का आदेश दिया जाता है।

इस मामले में जब राजस्व अधिकारी अंजलि शर्मा से संपर्क किया गया तो पहले उन्होंने राजस्व की धाराओं का पाठ पढ़ाया फिर लिपिकीय त्रुटि बता कर पल्ला झाड़ लिया। कुल मिलाकर मामला बहुत गंभीर है।
रायपुर के मठ-मंदिरो, सहकारी समितियों पर क़ब्ज़े, आर्थिक अफरातफरी कूटरचनाओं फर्जीवाड़ों और जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री की इनसाइड स्टोरी,क्रमशः – 2



