रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में अध्यक्ष पद करीब दो महीने से खाली है। पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रीता शांडिल्य का कार्यकाल 8 सितंबर 2026 को समाप्त होने के बाद अब तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है। न तो स्थायी अध्यक्ष की घोषणा हुई है और न ही मौजूदा सदस्यों में से किसी को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसका सीधा असर आयोग की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
608 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू का इंतजार
सबसे बड़ा असर राज्य सेवा परीक्षा-2025 के अभ्यर्थियों पर पड़ा है। मुख्य परीक्षा में सफल 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इनके साक्षात्कार 23 सितंबर से प्रस्तावित थे, लेकिन अध्यक्ष पद रिक्त होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग में 40 पदों और पुलिस विभाग में उप निरीक्षक, सूबेदार तथा प्लाटून कमांडर के 297 पदों से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं का कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ है।
26 नवंबर पर टिकी युवाओं की नजर
राज्य सेवा परीक्षा का नया विज्ञापन हर साल 26 नवंबर, संविधान दिवस के आसपास जारी किए जाने की परंपरा रही है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इससे पहले आयोग को नया अध्यक्ष नहीं मिलता, तो क्या आगामी राज्य सेवा परीक्षा का विज्ञापन तय समय पर जारी हो पाएगा?
भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं में असमंजस बढ़ रहा है।
अधिकारियों की DPC पर भी असर
CGPSC में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने का असर केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है।
संघ के मुताबिक, प्रदेश के 54 विभागों में कार्यरत अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया भी आयोग में अध्यक्ष पद रिक्त होने के कारण प्रभावित हो रही है।
नियुक्ति में देरी की वजह पर सस्पेंस
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अध्यक्ष पद को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि सरकार आयोग की पिछली विवादित छवि को देखते हुए ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी देना चाहती है, जिसकी छवि साफ हो और नियुक्ति पर सवाल न उठें।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी संभावित दावेदारों के तौर पर चर्चा में रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
दीपक बैज ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने CGPSC में अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले भाजपा ने युवाओं से यूपीएससी की तर्ज पर पारदर्शी तरीके से पीएससी परीक्षा आयोजित करने का वादा किया था, लेकिन अब युवाओं के साथ धोखा किया जा रहा है।
बैज ने राज्य सेवा परीक्षा-2025 की लिखित परीक्षा में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मामलों में एक अभ्यर्थी के सही उत्तर को अंक दिए गए, जबकि दूसरे अभ्यर्थी के समान उत्तर को गलत मानकर अंक नहीं दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि 2026 के इंटरव्यू और SI परीक्षा की प्रक्रिया प्रभावित होना इसी कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। उन्होंने पूरे PSC सिस्टम को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं कर पा रही है और इससे प्रदेश के युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
अब सरकार के फैसले का इंतजार
फिलहाल आयोग का कामकाज सदस्यों के स्तर पर जारी है, लेकिन अध्यक्ष पद खाली होने से कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभ्यर्थी, अधिकारी संगठन और विपक्ष सरकार से जल्द नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 26 नवंबर से पहले CGPSC को नया अध्यक्ष मिलेगा और रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को गति मिलेगी? हजारों अभ्यर्थियों की नजरें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।




