रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष के लिए धान खरीदी की तारीख तय कर दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने का निर्णय लिया गया। सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदेगी। वहीं, प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की सीमा निर्धारित की गई है।
कैबिनेट के इस फैसले से प्रदेश के धान उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने धान खरीदी की प्रक्रिया को सुचारु बनाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया है।
एग्रिस्टेक में पंजीकृत किसानों को राहत
धान खरीदी के लिए एग्रिस्टेक में पहले से पंजीकृत किसानों का पंजीयन इस बार भी मान्य रहेगा। ऐसे किसानों को दोबारा पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे किसानों को पंजीयन प्रक्रिया में होने वाली परेशानी से राहत मिलेगी।
धान खरीदी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, खरीदी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए उपार्जन केंद्रों और तकनीकी सुविधाओं के माध्यम से प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
200 यूनिट तक हाफ बिजली बिल योजना जारी रहेगी
छत्तीसगढ़ में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने वाली हाफ बिजली बिल योजना जारी रहेगी। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 200 यूनिट तक बिजली खपत पर हाफ बिजली बिल की रियायत जारी रखने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत पात्र घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को निर्धारित नियमों के अनुसार बिजली बिल में रियायत मिलती रहेगी। सरकार का उद्देश्य बिजली उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम करना और उन्हें राहत प्रदान करना है।
पांच साल तक चलेगा मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन शुरू करेगी। कैबिनेट ने इस मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन पांच साल की अवधि के लिए संचालित किया जाएगा। इसके लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मिशन के माध्यम से प्रदेश में पर्यटन विकास को गति देने और पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार पर्यटन से संबंधित विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को विस्तार देने में मदद मिलेगी।




