रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर दौरे, मुरिया दरबार की परंपराओं और भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर राज्य सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बस्तर दशहरा के पारंपरिक मुरिया दरबार की गरिमा और रीति-रिवाजों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। बैज ने राष्ट्रपति के दो दौरों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि इनसे बस्तर को क्या लाभ मिला।
‘मुरिया दरबार की परंपराओं का रखा जाए ध्यान’
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार को मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने आयोजन से जुड़े रीति-रिवाजों और परंपराओं के कथित उल्लंघन पर आपत्ति जताई। साथ ही, बस्तर दशहरा से संबंधित एक छायाचित्र में गलत चित्रण किए जाने का भी आरोप लगाया।
नक्सलवाद के मुद्दे पर बैज ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में लोग जेलों में बंद हैं। उन्होंने गंभीर नक्सली मामलों और सरकार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि राष्ट्रपति के पास संवैधानिक अधिकार हैं और वे इस विषय पर पहल कर सकती हैं।
1 नवंबर को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की रैली
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली रैली में हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल होंगे।
बैज के मुताबिक, प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा कथित वोट चोरी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से मतदाता सूची से नाम काटे जाने का विरोध होगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी बड़े प्रदर्शन की बात कही।
स्मृति ईरानी के दौरे पर भी साधा निशाना
भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे पर टिप्पणी करते हुए बैज ने सवाल उठाया कि क्या उनके आने से भाजपा के भीतर कथित गुटबाजी कम हो पाएगी। उन्होंने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए महंगाई के मुद्दे पर भी सवाल किए।
बैज ने चीनी और रसोई गैस की कीमतों का जिक्र करते हुए पूछा कि आम लोगों को सस्ती दरों पर ये जरूरी वस्तुएं कब मिलेंगी। उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर तंज कसते हुए उम्मीद जताई कि स्मृति ईरानी के दौरे से इन मुद्दों पर कोई ठोस परिणाम सामने आएगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इन बयानों से बस्तर दशहरा की परंपराओं, मतदाता सूची पुनरीक्षण और महंगाई जैसे मुद्दों पर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं।




