Bilaspur School News: बिलासपुर के मल्हार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं और शिक्षकों के बीच विवाद गहरा गया है। छात्राओं ने शिक्षकों पर दुर्व्यवहार, पढ़ाई में लापरवाही और विभिन्न अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच ने शिक्षकों के समर्थन में उतरकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस विवाद से जुड़ा कलेक्टर और एडिशनल कलेक्टर का कथित वायरल वीडियो भी चर्चा में है।
छात्राओं ने शिक्षकों पर लगाए गंभीर आरोप
मल्हार स्कूल की छात्राओं ने 1 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया था। छात्राओं की मांग थी कि संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और स्कूल के प्राचार्य को पद से हटाया जाए। छात्राओं ने शिक्षकों पर पढ़ाई में लापरवाही, अभद्र व्यवहार और शिकायत करने पर धमकी देने जैसे आरोप लगाए हैं।

छात्राओं के अनुसार, स्कूल में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ कुछ व्यवस्थाओं में भी अनियमितताएं हैं। उन्होंने संबंधित शिक्षकों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग भी की है।
वायरल वीडियो में क्या कहते सुनाई दे रहे कलेक्टर और एडिशनल कलेक्टर?
1 अक्टूबर 2026 का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कलेक्टर संजय अग्रवाल शिक्षकों की कमी का हवाला देते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि यदि चार शिक्षकों को निलंबित कर दिया जाएगा, तो उनकी जगह दूसरे शिक्षक कहां से लाए जाएंगे। वे यह भी कहते सुनाई दे रहे हैं कि दूसरे स्कूलों से शिक्षक लाने पर वहां के विद्यार्थी भी चक्काजाम कर सकते हैं।
वहीं, वीडियो में एडिशनल कलेक्टर शिव बनर्जी छात्राओं से कहते सुनाई दे रहे हैं कि उनकी ऊंची भाषा सही नहीं है और वे बाहर निकल जाएं।
हालांकि, वीडियो के पूरे संदर्भ और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
एएफ प्रभारी शिक्षिका पर रिकॉर्ड और राशि में गड़बड़ी का आरोप
छात्राओं ने एएफ प्रभारी शिक्षिका संगीता यादव पर पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने और राशि के हिसाब में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। छात्राओं का दावा है कि शिकायत करने पर उन्हें प्रोजेक्ट के अंक काटने और परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जाती है।
छात्राओं ने संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने और आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल कर कार्रवाई करने की मांग की है।
संस्कृत शिक्षक पर अभद्र भाषा और अश्लील टिप्पणी का आरोप
छात्राओं ने संस्कृत व्याख्याता संजय दुबे पर कक्षा में पढ़ाई के दौरान लापरवाही बरतने, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और अश्लील टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षक की शैक्षणिक डिग्री और अन्य दस्तावेजों की वैधता की जांच कराने की मांग की है।
ये आरोप छात्राओं की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गणित नहीं पढ़ाने और एक्सपायरी सैनिटरी पैड बांटने की शिकायत
छात्राओं ने गणित व्याख्याता काजल सोन पर कक्षा 10वीं में गणित नहीं पढ़ाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा, शासन की ओर से वितरित किए जाने वाले नि:शुल्क सैनिटरी पैड के वितरण में भी अनियमितता का दावा किया गया है।
छात्राओं का आरोप है कि उन्हें एक्सपायरी सैनिटरी पैड बांटे गए, जिसके इस्तेमाल के बाद एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। छात्राओं ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों को हटाने के निर्देश
छात्राओं की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। इसके बाद कलेक्टर की मंजूरी से जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने 9 अक्टूबर को प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों को अन्य स्कूलों में भेजने के निर्देश जारी किए।
जारी निर्देशों के अनुसार:
- प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला को मस्तूरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल कुकुर्दीकेरा भेजने के निर्देश दिए गए।
- व्याख्याता रश्मि गुप्ता को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपेड़ी भेजने के निर्देश दिए गए।
- व्याख्याता संजय दुबे को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर भेजने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, छात्राएं इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुईं। उनका कहना था कि केवल स्थानांतरण या स्कूल से हटाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने संबंधित लोगों को निलंबित करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
13 दिन के भीतर दूसरी बार कलेक्ट्रेट पहुंचीं छात्राएं
पहली कार्रवाई के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। 14 अक्टूबर को छात्राएं 13 दिनों के भीतर दूसरी बार कलेक्ट्रेट पहुंचीं और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई।
छात्राओं का कहना है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले में ठोस कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि स्कूल में पढ़ाई का माहौल बेहतर हो सके।
प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
छात्राओं के प्रदर्शन के बाद प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच भी सामने आए हैं। दोनों संगठनों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि प्राचार्य के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी निर्णय से पहले संबंधित प्राचार्य का पक्ष सुना जाना चाहिए और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नवंबर 2025 में संभाला था प्राचार्य ने पद
प्राचार्य कल्याण संघ के अनुसार, मल्हार स्कूल के प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला ने नवंबर 2025 में पदभार संभालने के बाद पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने, अनुशासन बनाए रखने और स्कूल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश की थी।
संघ का दावा है कि स्कूल के कुछ व्याख्याता और कर्मचारी इन सुधारों में सहयोग नहीं कर रहे थे। इससे स्टाफ के बीच तालमेल की कमी बढ़ी और इसका असर विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के संबंधों पर भी पड़ा।
संजय शर्मा के मुताबिक, संबंधित प्राचार्य दिव्यांग हैं और उनकी सेवा अवधि में एक साल से भी कम समय शेष है। इसके बावजूद वे नियमित रूप से स्कूल आकर शैक्षणिक गुणवत्ता और व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।
संघ का कहना है कि प्राचार्य का पक्ष सुने बिना उनके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। संगठन ने प्रशासन से सभी पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मल्हार स्कूल विवाद में अब आगे क्या?
मल्हार स्कूल का विवाद अब छात्राओं की शिकायतों और शिक्षकों के समर्थन में आए संगठनों की मांगों के बीच उलझ गया है। एक ओर छात्राएं निलंबन और एफआईआर की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्राचार्य कल्याण संघ निष्पक्ष जांच और प्राचार्य का पक्ष सुने जाने पर जोर दे रहा है।
अब मामले में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, सभी संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।




