बालोद : सुशासन का मतलब केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि कानून का पालन सुनिश्चित करना और जनता की शिकायतों का समय पर निराकरण करना भी है। बालोद जिले के थाना देवरी क्षेत्र स्थित जेवरतला रोड पर सरकारी जमीन को लेकर सामने आए विवाद ने प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी भूमि पर निजी निर्माण किया गया, शासकीय कुएं को समाहित किया गया और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी काम जारी रहा।
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मामला खसरा क्रमांक 908 और उसके उपखंड 908/7 तथा 908/8 से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, संबंधित जमीन सरकारी है और वहां निर्माण किए जाने की जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने तहसीलदार, ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन से शिकायत करने की बात कही है। समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि हाईकोर्ट से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश मिलने के बाद भी निर्माण जारी रहा। तहसीलदार की कथित प्रतिक्रिया और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। अब कलेक्टर से संयुक्त राजस्व जांच, शासकीय कुएं की स्थिति का सत्यापन और अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
थाना देवरी क्षेत्र के जेवरतला रोड का मामला प्रशासन के सामने एक अहम सवाल रखता है—क्या सरकारी जमीन और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ी शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण होगा? अब ग्रामीणों की निगाह जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।




