दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में कुलसचिव पद को लेकर प्रशासनिक विवाद एक बार फिर चर्चा में है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में अटैच करने संबंधी राज्य शासन के आदेश को निरस्त कर दिया है।
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शासन ने 29 सितंबर को यह आदेश जारी करते हुए साइंस कॉलेज, दुर्ग के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद की व्यवस्था को लेकर शासन के अगले कदम पर निगाहें टिकी हैं।
अटैचमेंट के लिए वैधानिक आधार नहीं बता सका शासन
भूपेंद्र कुलदीप ने शासन के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से दलील दी गई कि कुलदीप का आदेश नियमित स्थानांतरण नहीं, बल्कि उनके खिलाफ लंबित विभागीय जांच के मद्देनजर किया गया अटैचमेंट है।
हालांकि, अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के स्थानांतरण से संबंधित नियमों के आधार पर किसी कर्मचारी को उच्च शिक्षा संचालनालय जैसे सरकारी विभाग में अटैच करने का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। शासन की ओर से इस कार्रवाई के समर्थन में स्पष्ट वैधानिक प्रावधान या अधिकार नहीं बताया जा सका। इसके बाद अदालत ने संबंधित आदेश को निरस्त कर दिया।
29 सितंबर को जारी हुआ था आदेश
उच्च शिक्षा विभाग ने 29 सितंबर को भूपेंद्र कुलदीप को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में अटैच करने का आदेश जारी किया था। इसी आदेश के तहत साइंस कॉलेज दुर्ग में इतिहास के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव नियुक्त किया गया था।
इस फैसले के बाद कुलदीप ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शासन के आदेश को निरस्त कर दिया। इससे कुलदीप को संचालनालय भेजने के लिए जारी आदेश का आधार समाप्त हो गया है।
अब शासन के अगले फैसले का इंतजार
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थिति पर सबकी नजर है। एक ओर डॉ. अनिल कुमार पांडेय प्रभारी कुलसचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भूपेंद्र कुलदीप को संचालनालय में अटैच करने का आदेश अदालत निरस्त कर चुकी है।
ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य शासन हाईकोर्ट के फैसले के बाद कुलसचिव पद को लेकर क्या निर्णय लेता है और विश्वविद्यालय में प्रशासनिक व्यवस्था को किस तरह स्पष्ट किया जाता है।




