रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में ध्यानाकर्षण के दौरान इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बस्तर में नक्सल गतिविधियां कम होने के बाद वन्यजीव तस्कर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तार आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए और विभाग को पहले से अलर्ट मिलने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
महंत ने कहा कि पिछले 30 महीनों में छह बाघों की मौत हुई है और टाइगर रिजर्व में शिकार के दौरान कैमरे बंद होने तथा डिजिटल साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े आरोपियों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए और क्या पूरे मामले में किसी बड़े गिरोह की भूमिका है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार किसी भी आरोपी को बचाने की कोशिश नहीं कर रही है और न ही किसी का नाम छिपाया गया है। उन्होंने बताया कि मार्च और जून 2026 में हुई कार्रवाई में अब तक 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें महाराष्ट्र पुलिस के एक सिपाही और एक गोपनीय मुखबिर भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित सिपाही को निलंबित कर दिया गया है।
मंत्री ने बताया कि वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 6 बाघों की खाल, मूंछें, नाखून, कैनाइन दांत और शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए हैं। डीएनए जांच के लिए नमूने भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजे गए हैं।
उन्होंने कहा कि मामले में लापरवाही पाए जाने पर तीन वन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। सरकार बाघ संरक्षण को लेकर गंभीर है और प्रदेश में 126 कैमरों के माध्यम से निगरानी की जा रही है। वन मंत्री ने कहा कि एंटी-स्नेयर अभियान लगातार चलाया जा रहा है और वन्यजीव तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।



