रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट ने राज्य की दो प्रमुख योजनाओं—जल जीवन मिशन (JJM) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा)—के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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रिपोर्ट में योजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, लक्ष्य प्राप्ति, निगरानी व्यवस्था और जमीनी क्रियान्वयन में कई स्तरों पर कमियां उजागर हुई हैं। सीएजी ने स्पष्ट किया है कि इन खामियों को दूर किए बिना दोनों योजनाओं के मूल उद्देश्य हासिल करना कठिन होगा।
जल जीवन मिशन: ₹11 हजार करोड़ खर्च, फिर भी लक्ष्य अधूरा
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) पहुंचाना था। मिशन शुरू होने के समय राज्य के केवल 3.20 लाख ग्रामीण परिवारों (करीब 6 प्रतिशत) के पास नल कनेक्शन था। मार्च 2024 तक सरकार ने 38.97 लाख परिवारों (78 प्रतिशत) को कनेक्शन देने का दावा किया, लेकिन 11,034.26 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद छत्तीसगढ़ देश में 23वें स्थान पर रहा।
ऑडिट में सामने आया कि स्वीकृत 29,153 एकल ग्राम योजनाओं और 70 बहु-ग्राम योजनाओं में से मार्च 2024 तक केवल 172 एकल ग्राम योजनाएं ही पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 योजनाओं का संचालन ग्राम पंचायतों को सौंपा गया।
‘हर घर जल’ अभियान की प्रगति भी अपेक्षा से काफी पीछे रही। 19,656 गांवों को प्रमाणित करने के लक्ष्य के मुकाबले केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही प्रमाणित किए जा सके। जांच में ऐसे मामले भी मिले जहां अधूरी जलापूर्ति व्यवस्था के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित कर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार राज्य का कोई भी जिला या विकासखंड 100 प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। योजना निर्माण में भी गंभीर खामियां मिलीं। ग्राम कार्ययोजनाएं तैयार किए बिना जिला योजनाएं बनाई गईं और राज्य स्तरीय समग्र कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। शुरुआती दो वर्षों की देरी के कारण राज्य 6,480.04 करोड़ रुपये की संभावित वित्तीय सहायता का लाभ भी नहीं उठा सका।
जल गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था भी कमजोर पाई गई। राज्य की 75 प्रयोगशालाओं में केवल चार लैब ही सभी निर्धारित मानकों की जांच करने में सक्षम थीं, जबकि 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं के पास एनएबीएल मान्यता नहीं थी। वहीं सौर ऊर्जा आधारित कई जलापूर्ति योजनाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पानी उपलब्ध कराने में विफल रहीं, जिससे लगभग 28,984 परिवार प्रभावित हुए।
मनरेगा में भी सामने आईं कई अनियमितताएं
सीएजी की रिपोर्ट में मनरेगा के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक योजना निर्माण की सहभागी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। श्रम बजट तैयार करने से पहले गृह सर्वेक्षण नहीं कराए गए और परीक्षण की गई 48 ग्राम पंचायतों में लगभग 86 प्रतिशत कार्य ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना ही शुरू कर दिए गए।
योजना के संचालन में 21 प्रतिशत मानव संसाधन की कमी पाई गई। तकनीकी सहायकों और ग्राम रोजगार सहायकों के रिक्त पदों के कारण कार्य प्रभावित हुआ, जबकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 97 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई।
वित्तीय प्रबंधन में भी गंभीर खामियां सामने आईं। अप्रैल 2015 से मार्च 2023 के बीच 29.62 करोड़ रुपये का ईपीएफ अंशदान जमा नहीं किया गया, जिससे ब्याज और जुर्माने सहित देनदारी बढ़कर 84.59 करोड़ रुपये हो गई।
रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में भी योजना लक्ष्य से पीछे रही। वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान 152.36 लाख परिवारों ने रोजगार की मांग की, लेकिन केवल 134.10 लाख परिवारों को काम मिला। करीब 18.26 लाख परिवारों को रोजगार नहीं मिल सका और पात्र होने के बावजूद उन्हें बेरोजगारी भत्ता भी नहीं दिया गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि रोजगार पाने वाले परिवारों में 83 प्रतिशत परिवारों को 100 दिनों से कम रोजगार मिला, जबकि केवल 0.92 प्रतिशत परिवारों को निर्धारित 100 दिनों का रोजगार प्राप्त हुआ।
इसके अलावा स्वीकृत कार्यों में से अक्टूबर 2024 तक केवल 61 प्रतिशत कार्य ही पूरे हो सके। कई परिसंपत्तियां अनुपयोगी मिलीं और सामाजिक अंकेक्षण व्यवस्था भी कमजोर पाई गई। सामाजिक अंकेक्षण के लिए निर्धारित 58.68 करोड़ रुपये में से केवल 42.55 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि 45 प्रतिशत पद रिक्त रहे और 53 प्रतिशत से अधिक आपत्तियों का निराकरण लंबित पाया गया।
सुधार के लिए सीएजी की सिफारिशें
सीएजी ने दोनों योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए योजना निर्माण प्रक्रिया को मजबूत करने, वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने, निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने, जल गुणवत्ता परीक्षण और सामाजिक अंकेक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा संस्थागत क्षमता बढ़ाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कमियों को दूर किए बिना ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और रोजगार गारंटी योजना के उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।



