रायपुर। मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई के साथ-साथ न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने की दिशा में रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को बड़ी सफलता मिली है। विशेष ट्रायल मॉनिटरिंग अभियान के तहत उत्तर प्रदेश से दो फरार बेल जंपर आरोपियों को गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया है। दोनों आरोपी एनडीपीएस एक्ट के मामलों में जमानत मिलने के बाद न्यायालय में पेश नहीं हो रहे थे, जिसके कारण उनके खिलाफ जारी मुकदमों का अंतिम फैसला लंबित था।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार कमिश्नरेट स्तर पर ऐसे मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें आरोपी बेल पर छूटने के बाद लगातार न्यायालय से अनुपस्थित हैं। इसी कड़ी में पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल जोन) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में थाना गंज पुलिस की टीम ने उत्तर प्रदेश में दबिश देकर प्रयागराज निवासी योगेश हरिजन और जौनपुर निवासी जयबिग वर्मा को गिरफ्तार किया।
दोनों आरोपियों के खिलाफ रायपुर के विशेष एनडीपीएस न्यायालय से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी पहले एनडीपीएस एक्ट के मामलों में गिरफ्तार हुए थे, लेकिन जमानत मिलने के बाद सुनवाई के दौरान लगातार गैरहाजिर रहे और फरार हो गए। पुलिस ने विभिन्न राज्यों में उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाकर विशेष अभियान चलाया, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
रायपुर पुलिस का कहना है कि ट्रायल मॉनिटरिंग अभियान का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालतों में लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए फरार आरोपियों की तलाश, गवाहों की उपस्थिति, साक्ष्यों का समय पर प्रस्तुतिकरण और अभियोजन पक्ष के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
इस अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक 30 जून 2026 तक एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि के आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल दोषसिद्धि वाले प्रकरणों की संख्या 89 से बढ़कर 128 हो गई है, जबकि दोषी ठहराए गए अपराधियों की संख्या 161 से बढ़कर 206 तक पहुंच गई है।
सबसे अधिक सुधार उन मामलों में देखने को मिला है, जिनमें 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में दोषसिद्धि वाले प्रकरण 14 से बढ़कर 37 हो गए हैं, वहीं 10 वर्ष से अधिक की सजा पाने वाले दोषियों की संख्या 34 से बढ़कर 71 तक पहुंच गई है।



