रायपुर, 14 जुलाई। CGPSC Supreme Court Verdict : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021 भर्ती परीक्षा से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद सीबीआई चार्जशीट या जांच के दायरे से बाहर के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से किया इनकार
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने माना कि कुछ लोगों पर लगे आरोपों के आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
CGPSC की 2021 राज्य सेवा परीक्षा के जरिए 171 पदों, जिनमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी सहित अन्य पद शामिल थे, पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। मई 2023 में परिणाम घोषित होने के बाद चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के आरोप लगे। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई और नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई।
हाईकोर्ट ने पहले ही दिया था नियुक्ति का आदेश
बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल सामग्री या जांच नहीं है, उन्हें सशर्त नियुक्ति दी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि ये नियुक्तियां CBI जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी।
नियुक्ति के साथ रहेंगी ये शर्तें
- नियुक्ति CBI जांच के अंतिम निष्कर्ष के अधीन होगी।
- यदि भविष्य में किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता सामने आती है तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकेगी।
- नियुक्ति का अर्थ यह नहीं होगा कि संबंधित अभ्यर्थी को स्थायी क्लीन चिट मिल गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना होगा। इससे जांच से बाहर बेदाग अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।



