चंडीगढ़, 10 जुलाई। Punjab Congress Crisi : पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच प्रदेश प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और बड़ी होती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने फिलहाल भूपेश बघेल से सीधे मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने बैठक से पहले दो अहम शर्तें रखी हैं।
सूत्रों के अनुसार, पहली शर्त यह है कि बैठक कांग्रेस भवन में नहीं होगी, जबकि दूसरी शर्त के तहत पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे। चन्नी की ओर से दो प्रतिनिधियों के जरिए बातचीत का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी सामने आ रहा है।
चंडीगढ़ में डटे हैं भूपेश बघेल
भूपेश बघेल पिछले चार दिनों से चंडीगढ़ में रहकर पार्टी नेताओं से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। संगठन में चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए उनका दौरा अब तीन दिन और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी दौरान चन्नी गुट के पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक ने बघेल के डिनर कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अपने अंदाज में माहौल हल्का करने की कोशिश भी की।
राहुल गांधी से मिलना चाहते हैं चन्नी
सूत्रों के मुताबिक, चरणजीत सिंह चन्नी फिलहाल सीधे भूपेश बघेल से बातचीत करने के बजाय कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात करना चाहते हैं। उनका मानना है कि भविष्य से जुड़े बड़े राजनीतिक फैसलों और जिम्मेदारियों पर अंतिम सहमति राहुल गांधी से ही होनी चाहिए।
सभी गुटों को साथ लाने की कोशिश
दूसरी ओर, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। वहीं भूपेश बघेल पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर संगठन में एकजुटता कायम करने की कोशिश कर रहे हैं।
बघेल के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी जल्द खत्म नहीं हुई तो आने वाले समय में संगठन के भीतर मतभेद और गहरा सकते हैं। ऐसे में प्रदेश प्रभारी के तौर पर भूपेश बघेल के लिए सभी गुटों को साथ लाना उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकती है।



