सरकार के इस फैसले को प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में शुरुआती लेकिन अहम कदम माना जा रहा है। समिति विभिन्न राज्यों के अनुभवों, कानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार आगे की रणनीति तय करेगी। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पहल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे समानता और एकरूपता की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि विभिन्न वर्गों की राय जानने पर भी जोर दिया जा रहा है।छत्तीसगढ़ राज्य में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने एवं इसका प्रारूप तैयार करने राज्य शासन द्वारा समिति का गठन#UniformCivilCode#SushasanSarkar pic.twitter.com/jyOGTVoint
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) June 25, 2026
शादी से लेकर संपत्ति तक बदल सकते हैं कई नियम
अगर छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होता है, तो इसका असर मुख्य रूप से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े निजी कानूनों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समिति क्या सिफारिश करती है और सरकार अंतिम कानून में क्या प्रावधान शामिल करती है।1. विवाह के नियम एक समान हो सकते हैं
- सभी समुदायों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है।
- विवाह की न्यूनतम आयु और अन्य शर्तें समान हो सकती हैं।
- एक से अधिक विवाह (जहां वर्तमान कानून इसकी अनुमति देते हैं) पर एक समान नियम बन सकते हैं।
2. तलाक की प्रक्रिया में बदलाव
- अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग तलाक कानूनों की बजाय एक समान प्रक्रिया लागू हो सकती है।
- तलाक, गुजारा भत्ता और बच्चों की अभिरक्षा के मामलों में समान प्रावधान बनाए जा सकते हैं।
3. संपत्ति और उत्तराधिकार
- बेटा-बेटी, पति-पत्नी और अन्य उत्तराधिकारियों के अधिकारों को समान बनाने की दिशा में प्रावधान हो सकते हैं।
- संपत्ति के बंटवारे के नियम धर्म के बजाय एक समान कानून के तहत तय हो सकते हैं।
4. गोद लेने के नियम
- सभी समुदायों के लिए गोद लेने के समान नियम लागू किए जा सकते हैं।
- वर्तमान में जिन समुदायों के लिए गोद लेने के अलग प्रावधान हैं, उनमें बदलाव संभव है।
5. भरण-पोषण
- पति, पत्नी, बच्चों और आश्रित माता-पिता के भरण-पोषण के लिए एक समान व्यवस्था बनाई जा सकती है।
क्या नहीं बदलेगा?
- धार्मिक पूजा-पद्धतियां, रीति-रिवाज, त्योहार और धार्मिक मान्यताएं आमतौर पर UCC के दायरे में नहीं मानी जाती हैं।
- UCC का फोकस मुख्य रूप से सिविल (नागरिक) मामलों पर होता है, न कि धार्मिक आस्थाओं पर।

