दंतेवाड़ा। पंडेवार के घने जंगलों में लौह अयस्क की अवैध तस्करी का खेल अब और बड़ा रूप लेता दिख रहा है। शनिवार रात 14 चक्का भारी ट्रकों के जंगल में दाखिल होने से तस्करों का पूरा नेटवर्क सामने आ गया है। ग्रामीणों की सतर्कता से वन विभाग और पुलिस को सूचना मिलने के बाद पता चला कि जंगलों में लौह अयस्क को बड़े पैमाने पर जमा करके बाहर भेजने की तैयारी चल रही थी। स्थानीय युवाओं ने देखा कि रात के अंधेरे में भारी ट्रक जंगल की ओर जा रहे थे, जिसके बाद पूरा मामला उजागर हो गया।
यह भी पढ़े :- वर्ष 2014 से शुरू हुई विकास यात्रा आज भारत को विश्व पटल पर एक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर चुकी है : किरण देव
तस्करी का तरीका
ग्रामीणों के अनुसार, पंडेवार से आगे गोंदपाल क्षेत्र में पहाड़ के नीचे बड़ी मात्रा में लौह अयस्क डंप किया गया था। तस्कर ट्रैक्टरों की मदद से पहाड़ी ढलानों से अयस्क नीचे उतारकर जंगल के अंदर छिपाकर रखते थे, जहां से ट्रक आसानी से पहुंच सकें। बस्ती से मात्र दो किलोमीटर दूर जंगल में कई जगहों पर अयस्क का भंडार मिला है। तस्करों के लोग लगातार निगरानी रखते थे और आम ग्रामीण उस इलाके में जाने से डरते थे।
बैलाडीला के बाद नया रास्ता
बैलाडीला क्षेत्र में एनएमडीसी और मित्तल कंपनी से जुड़े लौह अयस्क चोरी के मामलों में सख्ती बढ़ने और सीसीटीवी निगरानी लगने के बाद तस्करों ने अब पंडेवार और गोंदपाल जैसे दूर-दराज के जंगलों को नया अड्डा बना लिया है। यहां से ट्रैक्टरों के जरिए अयस्क इकट्ठा कर जगदलपुर और रायपुर भेजा जा रहा है। बीजापुर जिले के मिरतुल क्षेत्र में भी इसी तरह की तस्करी की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों का दावा: एक कंपनी को खनन लीज तो मिली हुई है, लेकिन स्थानीय विरोध के कारण खनन शुरू नहीं हो पाया। उसी कंपनी की रॉयल्टी पर्चियों का गलत इस्तेमाल तस्करी में किया जा रहा है। हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी समेत कुछ सरपंचों ने आलनार क्षेत्र में बिना खनन के लौह अयस्क परिवहन का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। वन विभाग के रेंजर डॉ. प्रितेश पांडे ने कहा कि जंगल में कहीं भी अवैध भंडारण मिलने पर उसे जब्त किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



